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500 स्कूलों में बैगलेस डे पर अनोखी पहल, पोषण वाटिका, न्योता भोजन और पौधारोपण से बच्चों को मिली व्यवहारिक शिक्षा

Chhattisgarh 26 July 2026 (19)

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने शिक्षा को पोषण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ते हुए बैगलेस डे पर एक अनूठी पहल की है। जिले के लगभग 500 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ पोषण वाटिका निर्माण, न्योता भोजन, अतिरिक्त पूरक पोषण आहार वितरण और "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान का आयोजन किया गया। इस पहल में विद्यार्थियों के साथ शिक्षक, अभिभावक, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत विद्यालय परिसरों में सेमी, लौकी, बरबट्टी, खीरा और तरोई जैसी मौसमी सब्जियों का रोपण किया गया। इन पोषण वाटिकाओं में तैयार होने वाली ताजी सब्जियों का उपयोग प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मिलने वाले मध्यान्ह भोजन में किया जाएगा। इससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलने के साथ प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और संतुलित पोषण की व्यवहारिक जानकारी भी मिलेगी।

न्योता भोजन से बढ़ी सामुदायिक भागीदारी

बैगलेस डे के अवसर पर कई विद्यालयों में "न्योता भोजन" का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और अभिभावकों ने बच्चों के लिए फल, मिठाई और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया। इस पहल ने विद्यालय और समाज के बीच सहयोग को मजबूत करने का संदेश दिया।

"एक पेड़ माँ के नाम" अभियान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पौधारोपण किया और उनकी देखभाल का संकल्प लिया। इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।

जीवनोपयोगी शिक्षा का प्रभावी माध्यम बना बैगलेस डे

जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती लता बेक ने कहा कि बैगलेस डे केवल किताबों से अलग एक दिन नहीं, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी कौशल, सामुदायिक सहयोग, श्रम का सम्मान और प्रकृति से जुड़ाव सिखाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर का यह मॉडल शिक्षा, पोषण और जनसहभागिता के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे प्रदेश के अन्य जिले भी प्रेरणा ले सकते हैं।

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