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Bastar Dussehra News: 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुख्यमंत्री साय का निमंत्रण स्वीकार

रायपुर, 28 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं के प्रमुख पर्व बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने की सहमति दी है।

राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री का निमंत्रण पत्र सौंपे जाने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन उपस्थित रहे।
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की मौजूदगी
बस्तर दशहरा मां दंतेश्वरी की आराधना के साथ जुड़ी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए जाना जाता है। इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मुरिया दरबार है, जो बस्तर की सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था की अभिव्यक्ति माना जाता है।
मुरिया दरबार के माध्यम से पारंपरिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है। बस्तर के सामाजिक जीवन में मांझी और चालकी जैसे पारंपरिक पदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा व्यापक मंच
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगी।
उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बस्तर से राष्ट्रपति का रहा है जुड़ाव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। उस दौरान उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया था।
जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और जनजातीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका का उल्लेख किया था। ऐसे में 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखी जा रही है।







