Breaking
- चक्रवात 'अर्नब' की बारिश और तेज हवाओं के बीच 15 किमी पैदल चले स्कूली बच्चे, अ...
- Youth Conclave at NIT Raipur: विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे युवा, उप मुख्यमंत...
- Dweepti Yojana Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की 801 महिलाएं बनेंगी 'सोलर दीदी', द्व...
- CG Anti-Drugs Campaign: नशे के अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क को...
- Surajpur Development News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर को दी 232 कर...
- Cyclone Arnab Impact: लैंडफॉल के बाद और खतरनाक हुआ महाचक्रवात 'अर्नब', छत्तीस...
- Sarang Helicopter Display Team CG: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में गूंजेगा भारतीय वा...
- Sarang Helicopter Display Team CG: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में गूंजेगा भारतीय वा...
- सराफा व्यापारी से 50 लाख की सनसनीखेज लूट, जंगल के बीच 6 बदमाशों ने डंडे से हम...
- Surakshit Bachpan Abhiyan Raipur: रायपुर के 21 विद्यालयों में चला 'सुरक्षित ब...
CG Breaking : बस्तर में नक्सलवाद के अंत की शुरुआत: खूंखार नक्सली पापा राव समेत 18 कैडरों ने डाला हथियार

CG Breaking : बीजापुर। 24 मार्च 2026 : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी और निर्णायक खबर सामने आई है। माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। दशकों से आतंक का पर्याय रहे और साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव (DKSZC सदस्य) ने अपने 17 अन्य साथियों के साथ हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।

ऐतिहासिक आत्मसमर्पण
पहली बार माओवादी संगठन का शीर्ष नेतृत्व प्रभावी रूप से खत्म हो गया है। आत्मसमर्पण करने वालों में पापा राव के अलावा DVCM प्रकाश मड़वी और DVCM अनिल ताती जैसे बड़े नक्सली नेता शामिल हैं। इस समूह में 7 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिन्होंने शांति का मार्ग चुना है। पुनर्वास प्रक्रिया के तहत ये नक्सली अपने साथ AK-47 राइफलें और अन्य आधुनिक हथियार भी प्रशासन को सौंपेंगे।
अब नेतृत्वविहीन हुआ संगठन
दंडकारण्य क्षेत्र के इतिहास में यह पहली बार है जब नक्सली संगठन पूरी तरह नेतृत्वविहीन (Leaderless) हो गया है। जानकारों का मानना है कि पापा राव जैसे कद्दावर नेता का मुख्यधारा में आना नक्सली विचारधारा की हार और बस्तर में सरकार के 'शांति और विकास' के संकल्प की जीत है।
प्रशासन की अपील
सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इसे 'नक्सल-मुक्त बस्तर' की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया है। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि जंगलों में भटक रहे अन्य छोटे समूह भी इन बड़े नेताओं से प्रेरणा लेंगे और जल्द ही हिंसा छोड़कर वापस लौटेंगे। इन सभी 18 कैडरों के औपचारिक पुनर्वास की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।







