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दिल्ली AIIMS में हार्ट सर्जरी में 'रिकॉर्ड' गिरावट: क्यों ऑपरेशन कराने से कतरा रहे हैं मरीज? सामने आई ये चौंकाने वाली रिपोर्ट...

National RRT News Desk 26 January 2026 (26)

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देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, AIIMS दिल्ली से एक हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जहाँ आमतौर पर हार्ट सर्जरी के लिए महीनों और सालों की लंबी वेटिंग लिस्ट होती थी, वहीं पिछले कुछ समय में सर्जरी कराने वाले मरीजों की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई मरीज सर्जरी की तारीख मिलने के बावजूद अस्पताल नहीं पहुँच रहे हैं या अंतिम समय पर अपना इरादा बदल रहे हैं।

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इस गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह 'लंबी वेटिंग लिस्ट' (Waiting List) बताई जा रही है। कई मामलों में मरीजों को 2028-2030 तक की तारीखें दी जा रही हैं। इतनी लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण मरीज या तो अन्य सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं या निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए मजबूर हैं। साथ ही, EECP (Enhanced External Counterpulsation) और जीवनशैली में बदलाव जैसे 'बिना सर्जरी' वाले वैकल्पिक इलाजों की बढ़ती लोकप्रियता भी एक कारण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड के कारण हार्ट अटैक और एनजाइना (Angina) के मामले बढ़ जाते हैं। AIIMS के कार्डियोलॉजी विभाग के अनुसार, सर्दियों में नसें सिकुड़ने से बीपी बढ़ता है और रिस्क ज्यादा होता है। इसके बावजूद, सर्जरी के लिए भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में कमी आना डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह कमी तकनीकी कारणों से है या मरीजों के डर की वजह से।

एक तरफ जहाँ ओपन हार्ट सर्जरी के आंकड़े गिरे हैं, वहीं AIIMS ने हाल ही में 1000 रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी करने का रिकॉर्ड बनाया है। आधुनिक तकनीक और कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी की ओर मरीजों का झुकाव बढ़ रहा है। रोबोटिक सर्जरी में रिकवरी समय कम होता है, जिससे मरीज पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी (Open Heart Surgery) के बजाय इन विकल्पों को चुन रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें थोड़ा इंतजार करना पड़े।

सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत अब कई गंभीर हृदय रोगों का इलाज टियर-2 और टियर-3 शहरों के अस्पतालों में भी उपलब्ध है। इस कारण उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा के मरीज अब सीधे दिल्ली AIIMS आने के बजाय अपने राज्यों के बड़े मेडिकल कॉलेजों में इलाज करा रहे हैं। इससे AIIMS पर बोझ तो कम हुआ है, लेकिन यहाँ के मुख्य कार्डियक सेंटर में सर्जरी के कम होते आंकड़ों ने प्रशासन को कार्यप्रणाली की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।

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