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दो बार वोट डालना कितना बड़ा 'गुनाह'? सांसद शांभवी चौधरी के वायरल वीडियो पर गरमाया माहौल, जानिए कानून में कितनी है सज़ा

Chhattisgarh 09 November 2025 (150)

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पटना/नई दिल्ली: बिहार चुनाव 2025 में मतदान के दौरान समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पटना के बांकीपुर में हुए मतदान का यह वीडियो कांग्रेस द्वारा उठाया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सांसद के दोनों हाथों की उंगलियों पर स्याही के निशान दिख रहे हैं। विपक्षी दल ने इस आधार पर उनके द्वारा दो बार वोट डाले जाने की आशंका जताई है, जिसके बाद देश में 'डबल वोटिंग' से जुड़े कानून पर बहस छिड़ गई है।

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क्या कहता है भारतीय कानून?

एक ही चुनाव में एक से अधिक बार या एक से अधिक जगह से वोट डालना कोई छोटी गलती नहीं, बल्कि भारतीय कानून के तहत एक गंभीर चुनावी अपराध है।

मूल अधिकार: भारत के संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार, हर नागरिक को केवल एक बार और एक ही निर्वाचन क्षेत्र में वोट डालने का अधिकार है।

अपराध की श्रेणी: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या धोखे से दो बार वोट डालता है, तो यह अधिनियम की धारा 62(4) और धारा 31 के तहत अपराध माना जाता है।

 कितनी हो सकती है सज़ा?

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 उन लोगों को अपराधी मानती है, जो जानबूझकर अपने नाम को एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज कराते हैं, या दो जगह से मतदान करते हैं।

चुनावी अपराध लागू धारा अधिकतम सज़ा

दो बार मतदान करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 छह महीने की कैद या जुर्माना, या दोनों

दो निर्वाचन क्षेत्रों में नाम दर्ज कराना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31

यानी, आपराधिक इरादे से दो बार वोट डालने वाले व्यक्ति को जेल की सज़ा और आर्थिक दंड दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।

 'गुनाह' कैसे साबित होता है?

चुनाव आयोग (ECI) अब ऐसी गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए बेहद सख्त है।

डिजिटल सत्यापन: ईवीएम, वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन सिस्टम और फिंगरप्रिंट मिलान के जरिए किसी भी डुप्लिकेट वोटर को आसानी से पकड़ा जा सकता है।

कानूनी कार्रवाई: दोहराव पाए जाने पर जिला निर्वाचन अधिकारी या पुलिस के जरिए एफआईआर (FIR) दर्ज की जाती है।

मौके पर गिरफ्तारी: वोटिंग बूथ पर एक ही व्यक्ति का बार-बार वोट डालने का मामला अगर मौके पर पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत हिरासत में भी लिया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 'एक व्यक्ति एक वोट' लोकतंत्र की मूल आत्मा है। इस नियम को तोड़ने वाला न केवल कानून तोड़ता है, बल्कि लोकतंत्र के विश्वास के साथ भी धोखा करता है।


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