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Mahtari Vandan Yojana: हर महीने ₹1000 से ईश्वरी ने संवारी सब्जी-बाड़ी, अब परिवार की आमदनी बढ़ाने में बनीं भागीदार

Chhattisgarh 05 October 2026

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रायपुर, 5 अक्टूबर 2026। जीपीएम जिले के पेंड्रा विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी की 40 वर्षीय ईश्वरी मरकार के लिए महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली ₹1,000 की राशि आर्थिक सहायता से आगे बढ़कर आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का आधार बनी है। इस राशि का उपयोग करते हुए ईश्वरी ने अपने घर के पीछे की जमीन पर सब्जी-बाड़ी विकसित की है। यहां उगाई गई ताजी सब्जियां परिवार के उपयोग में आती हैं, जबकि अतिरिक्त उपज को बेचकर वह आमदनी भी कर रही हैं।

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एक समय ऐसा भी था जब घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए ईश्वरी को दूसरों से पैसे उधार लेने पड़ते थे। कई बार जरूरत जरूरी होने के बावजूद उधार नहीं मिल पाता था। सीमित आय के बीच घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौती बना रहता था। इन परिस्थितियों के कारण उन्हें काफी परेशानी और निराशा का सामना करना पड़ता था।

अब महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने उनकी स्थिति में बदलाव लाया है। हर महीने बैंक खाते में ₹1,000 आने से उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। ईश्वरी के अनुसार, पहले जरूरी काम के लिए भी पैसे जुटाना मुश्किल होता था, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन रही है।

₹1,000 की सहायता को बनाया आमदनी का जरिया

ईश्वरी ने योजना से मिलने वाली राशि को केवल घरेलू खर्च में इस्तेमाल करने के बजाय उसका एक हिस्सा सब्जी-बाड़ी विकसित करने में लगाया। घर के पीछे उपलब्ध जमीन पर उन्होंने अलग-अलग प्रकार की सब्जियां उगानी शुरू कीं। परिवार इन सब्जियों का उपयोग भोजन में करता है और अतिरिक्त उपज को बाजार में बेचकर ईश्वरी अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

सब्जी-बाड़ी से परिवार के लिए बाजार से सब्जियां खरीदने का खर्च कम हुआ है। साथ ही अतिरिक्त उत्पादन की बिक्री से आय का एक छोटा लेकिन नियमित जरिया भी तैयार हुआ है। घर के पीछे विकसित यह बाड़ी अब ईश्वरी के लिए सिर्फ सब्जियां उगाने की जगह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम का माध्यम बन गई है।

बच्चों की पढ़ाई में भी मिल रहा सहारा

महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग ईश्वरी अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में भी कर रही हैं। हर महीने निश्चित राशि मिलने से परिवार के बजट को संभालने में मदद मिल रही है और बच्चों की छोटी-छोटी शैक्षणिक जरूरतें पूरी करने में भी सहारा मिल रहा है।

ईश्वरी की कहानी यह बताती है कि आर्थिक सहायता का सही उपयोग मेहनत और योजना के साथ किया जाए तो वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का माध्यम बन सकती है। उन्होंने योजना की राशि को अपनी मेहनत से जोड़कर इसे अतिरिक्त आय के साधन में बदलने की कोशिश की है।

आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में आया बदलाव

ईश्वरी के जीवन में आया बदलाव केवल आर्थिक नहीं है। पहले जरूरत के समय दूसरों से उधार मांगने की मजबूरी उन्हें परेशान करती थी, जबकि अब अपनी सब्जी-बाड़ी में मेहनत कर आय अर्जित करने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी में उनके घर के पीछे की हरी-भरी सब्जी-बाड़ी उनके बदलते जीवन की तस्वीर बन गई है।

ईश्वरी मरकार ने महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि योजना ने उन्हें आर्थिक सहारा देने के साथ अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है। उनके अनुसार, आर्थिक संबल और मेहनत के साथ ग्रामीण महिलाएं परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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