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Organic Bastar News: दंतेवाड़ा की 930 महिला किसानों को बड़ी उपलब्धि, इमली-महुआ और आम को मिला राष्ट्रीय जैविक प्रमाणपत्र

Chhattisgarh 13 October 2026 (9)

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की जैविक वनोपजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। दंतेवाड़ा जिले की मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड द्वारा संग्रहित इमली, महुआ और आम को भारत सरकार के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत जैविक प्रमाणपत्र मिला है। छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा संग्रहित इन वनोपजों को यह प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इससे कंपनी से जुड़ी 930 महिलाओं के लिए बेहतर बाजार और आय बढ़ाने के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

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इमली, महुआ और आम को मिलेगा प्रीमियम बाजार

राष्ट्रीय जैविक प्रमाणपत्र मिलने से दंतेवाड़ा की महिला किसानों द्वारा संग्रहित वनोपजों को देश के प्रीमियम जैविक बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इन उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जैविक प्रमाणीकरण से उत्पादों की बाजार में पहचान मजबूत करने और महिलाओं को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में अवसर मिल सकते हैं।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति (CGCERT) ने इस प्रक्रिया को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पहल का उद्देश्य बस्तर की प्राकृतिक संपदा को स्थानीय महिलाओं की आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ना है।

930 जनजातीय महिलाओं को मिलेगा लाभ

मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी से वर्तमान में 930 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं जनजातीय समुदायों से आती हैं और परंपरागत रूप से वनोपजों का संग्रहण करती हैं। जैविक प्रमाणन से उनके उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और बेहतर कीमत प्राप्त करने के अवसर बढ़ सकते हैं।

आने वाले समय में कंपनी से जुड़ी महिलाओं की संख्या बढ़कर 2,000 से अधिक होने की संभावना जताई गई है। इससे अधिक महिलाओं को संगठित रूप से वनोपज संग्रहण, विपणन और आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में यह पहल स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से क्षेत्र में शांति और विकास के अवसरों के बीच अब प्राकृतिक संसाधनों को स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

जैविक प्रमाणीकरण के माध्यम से बस्तर की इमली, महुआ और आम जैसी वनोपजों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे जनजातीय महिलाओं को अपनी पारंपरिक आजीविका के जरिए आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल सकती है।

CGCERT ने पूरी की प्रमाणीकरण प्रक्रिया

इस प्रमाणीकरण की प्रक्रिया प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा CGCERT के अध्यक्ष अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में पूरी की गई। CGCERT के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिमेष गोवर्धन ने इस प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को आवश्यक समन्वय और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के तहत प्रमाणन मिलने से कंपनी के उत्पादों को जैविक बाजारों में पहचान बनाने का अवसर मिलेगा। इससे उत्पादों के विपणन और संभावित निर्यात के लिए आगे की राह आसान हो सकती है।

10 हजार किसानों तक पहल का विस्तार करने की तैयारी

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस पहल को बस्तर संभाग के लगभग 10 हजार पीजीएस (PGS) से जुड़े किसानों और अन्य महिला किसान उत्पादक कंपनियों तक विस्तारित करने की संभावना है। योजना का उद्देश्य अधिक किसानों और महिला समूहों को जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ना है।

इस पहल के विस्तार से बस्तर को जैविक वनोपजों के प्रमुख उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही हजारों जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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