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मुख्यमंत्री साय का अधिकारियों को दो टूक: "जनता को सुनें, सुनाएं नहीं"; व्यवहार में शालीनता लाने के कड़े निर्देश

RRT News- Raipur छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक मानवीय और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि दफ्तरों में आने वाली आम जनता के साथ अधिकारी पूरी शालीनता और संवेदनशीलता से पेश आएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सरकारी तंत्र का काम उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक 'सुनना' है, न कि उन्हें अपनी शक्ति का धौंस 'सुनाना'।

मुख्यमंत्री ने यह निर्देश 'सुशासन' की अवधारणा को जमीनी स्तर पर उतारने के उद्देश्य से दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया कि किसी भी स्तर पर यदि जनता के साथ दुर्व्यवहार या उनकी अनदेखी की शिकायत मिली, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साय सरकार का स्पष्ट मानना है कि एक लोक सेवक (Public Servant) का असली परिचय उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसके सेवा भाव और मृदु व्यवहार से होता है।
इस निर्देश के पीछे मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
संवादात्मक दृष्टिकोण: अधिकारी फाइलों के साथ-साथ इंसानियत पर भी ध्यान दें।
त्वरित निराकरण: समस्याओं को केवल सुनना ही काफी नहीं, बल्कि उनका समय सीमा के भीतर समाधान भी होना चाहिए।
फीडबैक तंत्र: सरकार अब जनता से सीधे फीडबैक ले रही है कि दफ्तरों में उनके साथ कैसा व्यवहार हो रहा है।
मुख्यमंत्री की इस सख्ती का उद्देश्य दफ्तरों में व्याप्त 'लालफीताशाही' और अहंकार को खत्म करना है। 'सुशासन तिहार' जैसे अभियानों के बीच यह निर्देश प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सचिवालय से लेकर तहसील कार्यालयों तक के अधिकारी इस 'शालीनता' के मंत्र को कितनी गंभीरता से अपने कार्य व्यवहार में शामिल करते हैं।







