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महावीर जयंती 2026: 'जियो और जीने दो' का शाश्वत संदेश; क्या आज के अशांत युग में भगवान महावीर के सिद्धांत ही हैं एकमात्र समाधान?

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RRT News - आज समूचा विश्व और जैन समाज सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह के प्रणेता भगवान महावीर का 2625वां जन्म कल्याणक (जयंती) मना रहा है। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के इस पावन अवसर पर चारों ओर 'महावीर अष्टक' और 'जियो और जीने दो' के स्वर गूंज रहे हैं। साल 2026 में यह पर्व 31 मार्च (मंगलवार) को मनाया जा रहा है।

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ऐसे समय में जब दुनिया युद्ध, जलवायु परिवर्तन और मानसिक तनाव से जूझ रही है, भगवान महावीर के ढाई हजार साल पुराने सिद्धांत पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

1. राजकुमार वर्धमान से तीर्थंकर महावीर तक का सफर

ईसा पूर्व 599 में कुंडलपुर (बिहार) के राजघराने में जन्मे राजकुमार वर्धमान ने केवल 30 वर्ष की आयु में राजसी सुखों का त्याग कर दिया था।

कठोर तप: 12 वर्षों की मौन और कठिन साधना के बाद उन्हें 'कैवल्य ज्ञान' (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त हुआ।

इंद्रियों पर विजय: अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने के कारण उन्हें 'महावीर' और 'जिनेन्द्र' कहा गया।

2. पंचशील सिद्धांत: सुखी जीवन का आधार

भगवान महावीर ने समाज को पांच महाव्रत दिए, जो आज के कॉरपोरेट और सामाजिक जीवन में 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' और 'एथिक्स' का आधार बन सकते हैं:

अहिंसा (Non-violence): केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मन और वाणी से भी किसी को कष्ट न देना।

सत्य (Truth): सदैव सत्य बोलना और धर्म का मार्ग अपनाना।

अचौर्य (Non-stealing): किसी दूसरे की वस्तु को बिना उसकी अनुमति के न लेना।

ब्रह्मचर्य (Chastity): पवित्रता और संयम का पालन करना।

अपरिग्रह (Non-attachment): ज़रूरत से ज़्यादा धन और वस्तुओं का संचय न करना। (यह सिद्धांत आज के ग्लोबल वार्मिंग और उपभोक्तावाद के दौर में सबसे महत्वपूर्ण है)।

3. 'अनेकांतवाद': वैचारिक मतभेदों का हल

महावीर स्वामी का 'अनेकांतवाद' और 'स्याद्वाद' का दर्शन कहता है कि किसी भी सत्य को देखने के कई नजरिए हो सकते हैं। यदि हम दूसरों के दृष्टिकोण को समझना शुरू कर दें, तो दुनिया से वैचारिक मतभेद और युद्ध स्वतः समाप्त हो सकते हैं।

4. 2026 में आयोजन: 'अहिंसा रन' और 'जीव दया'

इस साल महावीर जयंती पर देश भर में विशेष उत्साह है:

प्रभात फेरी और रथ यात्रा: देश के प्रमुख जैन मंदिरों (जैसे सम्मेद शिखरजी, पावापुरी और दिल्ली के लाल मंदिर) में भव्य अभिषेक और शांति धारा का आयोजन किया गया है।

अहिंसा रन (Ahimsa Run): युवाओं को अहिंसा के प्रति जागरूक करने के लिए कई शहरों में मैराथन का आयोजन किया गया।

जीव दया: जैन समाज द्वारा पक्षियों के लिए परिंडे लगाने, गौशालाओं में दान और जरूरतमंदों को भोजन वितरण के बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं।

 केवल जैनों के नहीं, विश्व के हैं

भगवान महावीर का संदेश किसी एक धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। उनका 'जियो और जीने दो' का नारा आज के 'Eco-friendly' जीवन जीने का सबसे बड़ा मंत्र है।

संपादकीय संदेश: इस महावीर जयंती पर आइए हम संकल्प लें कि हम अपने क्रोध और लोभ पर विजय पाएंगे और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेंगे।

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