पुरी। विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह है। भगवान जगन्नाथ के भव्य नंदीघोष रथ को खींचने वाले चार सफेद घोड़े केवल सजावट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनका गहरा आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन चार घोड़ों के नाम शंख, बलाहक, श्वेत और हरिदाश्व हैं, जो दिव्य शक्ति, पवित्रता, गति और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा में तीन प्रमुख रथ निकलते हैं—भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तालध्वज और माता सुभद्रा का दर्पदलन। प्रत्येक रथ के साथ चार-चार घोड़े जुड़े होते हैं, जिनके अलग-अलग नाम और प्रतीकात्मक महत्व हैं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के सफेद घोड़े सृष्टि में प्रकाश, सत्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देते हैं तथा भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकलने वाली यह रथ यात्रा पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक आयोजित होती है। लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचने को सौभाग्य मानते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रतीक मानी जाती है







