Breaking
- Cyclone Arnab Impact: लैंडफॉल के बाद और खतरनाक हुआ महाचक्रवात 'अर्नब', छत्तीस...
- Sarang Helicopter Display Team CG: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में गूंजेगा भारतीय वा...
- Sarang Helicopter Display Team CG: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में गूंजेगा भारतीय वा...
- सराफा व्यापारी से 50 लाख की सनसनीखेज लूट, जंगल के बीच 6 बदमाशों ने डंडे से हम...
- Surakshit Bachpan Abhiyan Raipur: रायपुर के 21 विद्यालयों में चला 'सुरक्षित ब...
- Balcony Gardening Tips: अपनी बालकनी को बनाएं खूबसूरत 'मिनी बटरफ्लाई गार्डन', ...
- Horoscope Today 28 October 2026: मिथुन और सिंह राशि वालों को नौकरी में तरक्की...
- Utkrisht Krishak Ratn Samman: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- 'किसानों की सम...
- Bastar Dussehra Concludes: विश्व प्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा का हुआ समापन,...
- मोबाइल देखने को लेकर उपजे विवाद में खूनी संघर्ष, बड़े भाई ने डंडे से पीट-पीटक...
Maoist Hotbed Rescue: 'अबूझमाड़' के अभेद्य जंगलों में जब मौत बनकर मंडराई प्रसव पीड़ा, तब ITBP के कंधे बने जीवन रक्षक

नारायणपुर/अबूझमाड़: छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र, जिसे अक्सर देश के सबसे संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में गिना जाता है, वहां एक बार फिर खाकी वर्दी के पीछे छिपी इंसानियत की तस्वीर सामने आई है। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के अति-संवेदनशील गांव बोटेर में, जहाँ माओवादियों की धमक और बुनियादी सुविधाओं का अभाव रोजमर्रा की चुनौती है, वहाँ ITBP के जवानों ने एक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से जितना खतरनाक है, प्राकृतिक रूप से उतना ही चुनौतीपूर्ण है।

27 मार्च, शुक्रवार को ITBP की 29वीं बटालियन को खबर मिली कि बोटेर गाँव में एक गर्भवती महिला की स्थिति बेहद नाजुक है और उसे फौरन डॉक्टरी सहायता की जरूरत है। चुनौती पहाड़ जैसी थी - न सड़क, न एंबुलेंस, और हर कदम पर खतरा। लेकिन सहायक कमांडेंट अनिल कुमार के नेतृत्व में क्विक रिएक्शन टीम (QRT) ने एक पल भी नहीं गंवाया। जवानों ने तुरंत स्थानीय संसाधनों से एक अस्थायी स्ट्रेचर तैयार किया और महिला को उस पर लिटाकर, घने जंगलों, तीखी ढलानों और उबड़-खाबड़ रास्तों के बीच से सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया।
5 किमी का 'जीवन संघर्ष'
जवानों को महिला को मुख्य सड़क तक लाने के लिए करीब 5 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ा। यह महज एक पैदल यात्रा नहीं, बल्कि समय और परिस्थितियों के खिलाफ एक 'जीवन संघर्ष' था। घने जंगल के बीच से गुजरते हुए, जहाँ खतरा हर कोने पर छिपा हो सकता है, जवानों ने महिला को पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ पहुँचाया। उनकी इस जांबाजी और तत्परता की वजह से महिला को समय पर अस्पताल पहुँचाया जा सका, जहाँ उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। यह घटना साबित करती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी 'हिमवीर' देश की सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों के रक्षक भी हैं।







