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लाल गलियारे की वो 'अधूरी दास्तां'... जंगलों में गोलियों की तड़तड़ाहट के साथ ही दफन हो गई माओवादी कमांडर की प्रेम कहानी!

RRT News- बस्तर के जंगलों में गूंजने वाली गोलियों की तड़तड़ाहट ने इस बार न सिर्फ एक इनामी नक्सली का अंत किया, बल्कि जगदलपुर और कांकेर के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय एक प्रेम कहानी को भी हमेशा के लिए खामोश कर दिया। कांकेर के माचपल्ली-आरामझोरा-हिडूर के बीहड़ जंगलों में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक बड़े कमांडर के मारे जाने की खबर है। यह मुठभेड़ उस वक्त हुई जब नक्सली किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

जंगलों के भीतर दबी जुबान में चर्चा है कि यह कमांडर लंबे समय से एक महिला नक्सली साथी के साथ संगठन में रहते हुए अपनी प्रेम कहानी आगे बढ़ा रहा था। जगदलपुर संभाग के इन दुर्गम इलाकों में जहां डर का साया रहता है, वहां बदले की आग और खूनी संघर्ष के बीच पनपा यह रिश्ता अब मिट्टी में मिल चुका है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में जब गोलियां चलीं, तो इस कमांडर की मौत के साथ ही वर्षों से चला आ रहा वह सफर भी खत्म हो गया, जो हथियारों के साये में शुरू हुआ था।
सुरक्षाबलों को मौके से भारी मात्रा में विस्फोटक और दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस मुठभेड़ के बाद संगठन के भीतर हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि यह कमांडर रणनीति बनाने में माहिर माना जाता था। जगदलपुर पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों ने इस ऑपरेशन को इतनी सटीकता से अंजाम दिया कि नक्सलियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बदले की जिस आग में यह कमांडर जल रहा था, वह अंततः उसकी अपनी ही मौत का कारण बनी।
मुठभेड़ के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मारे गए माओवादी कमांडर की शिनाख्त और उसके प्रेम संबंधों से जुड़े पहलुओं की भी अंदरूनी जांच की जा रही है। जगदलपुर क्षेत्र में माओवाद की कमर तोड़ने के लिए यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। खामोश जंगलों में अब सन्नाटा तो है, लेकिन यह सन्नाटा उन हथियारों और अधूरी प्रेम कहानियों की गवाही दे रहा है जो हिंसा के रास्ते पर चलकर विनाश पर ही खत्म होती हैं।







