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किसानों को बड़ी सौगात: अब घर के पास मिलेगी खाद-बीज की सुविधा, जिले में 22 नई सेवा सहकारी समितियां शुरू

बालोद- किसानों की सुविधा के लिए ऐतिहासिक विस्तार छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और किसानों की समस्याओं को कम करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिले में 22 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस विस्तार के बाद अब किसानों को खाद, उन्नत बीज और कृषि ऋण के लिए लंबी दूरी तय कर बड़े केंद्रों तक जाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार के इस निर्णय से ग्रामीण अंचलों में खुशी की लहर है, क्योंकि अब उन्हें उनके घर के पास ही सुव्यवस्थित सरकारी सुविधाएं प्राप्त होंगी।

दूरी की समस्या का होगा स्थायी समाधान इससे पहले बालोद जिले के कई गांवों के किसानों को खाद-बीज लेने या अपनी उपज बेचने के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। भारी बारिश या खेती के व्यस्त सीजन के दौरान यह दूरी किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती थी। नई समितियों के गठन से न केवल परिवहन का खर्च बचेगा, बल्कि किसानों के समय की भी बचत होगी। इन समितियों को सीधे तौर पर स्थानीय गांवों से जोड़ा गया है, जिससे वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और भीड़-भाड़ की समस्या से भी निजात मिलेगी।
पंजीयन और ऋण प्रक्रिया में आएगी तेजी नई समितियों के शुरू होने से धान खरीदी के समय होने वाले पंजीयन और केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से मिलने वाले ऋण की प्रक्रिया भी सुगम हो जाएगी। अब किसान अपने नजदीकी केंद्र पर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करा सकेंगे और बिना किसी बिचौलिए के सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि इन सभी 22 केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज का स्टॉक उपलब्ध रहे, ताकि बुवाई के समय किसानों को किसी भी प्रकार की किल्लत का सामना न करना पड़े।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग के इस साझा प्रयास को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए 'बूस्टर डोज' माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर समितियों के संचालन से न केवल खेती-किसानी आसान होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के छोटे अवसर भी पैदा होंगे। समितियों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि बालोद जिले का प्रत्येक किसान आत्मनिर्भर बने और उसे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भटकना न पड़े।







