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लाल आतंक पर अंतिम प्रहार: बजट 2026 में नक्सलवाद के खात्मे के लिए 3610 करोड़ का आवंटन, फंड में 20% की भारी बढ़ोतरी

Chhattisgarh RRT News Desk 01 February 2026

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केंद्र सरकार ने बजट 2026 में 'लाल आतंक' यानी नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए अपने संकल्प को और मजबूत किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष बुनियादी ढांचा योजना के तहत 3,610.80 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 3,006.56 करोड़ रुपये की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की बड़ी वृद्धि है। यह निर्णय गृह मंत्रालय के उस लक्ष्य की पूर्ति के लिए लिया गया है, जिसमें 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने की समय सीमा तय की गई है।

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बजट में किए गए इस प्रावधान का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे प्रभावित राज्यों में सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करना है। आवंटित राशि का उपयोग सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण, परिचालन संबंधी जरूरतों, और नक्सल हिंसा में शहीद जवानों व नागरिकों के परिवारों को अनुग्रह राशि (Ex-gratia) देने के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सरकार ने विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) के माध्यम से 35 सबसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि विकास की धारा सुदूर वनांचलों तक पहुंच सके।

सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने 'हृदय और दिमाग' जीतने की रणनीति पर भी जोर दिया है। बजट में सिविक एक्शन प्रोग्राम (CAP) और मीडिया प्लान के लिए विशेष फंड रखा गया है। इसके तहत सुरक्षा बल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक पुलिसिंग, युवाओं के लिए कौशल विकास और जागरूकता अभियान चलाएंगे। सरकार का मानना है कि केवल बंदूक के दम पर नहीं, बल्कि मोबाइल कनेक्टिविटी, बेहतर सड़कों और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से ही नक्सलवाद की विचारधारा को खत्म किया जा सकता है। पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए भी बजट को 24% बढ़ाकर 4,061.34 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

गृह मंत्री अमित शाह के 'जीरो टॉलरेंस' विजन को आगे बढ़ाते हुए, यह फंड उन अंतिम मोर्चों पर खर्च होगा जहाँ अभी भी माओवादी गतिविधियां शेष हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में नक्सली घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है और अब यह केवल कुछ चुनिंदा जिलों तक सिमट कर रह गया है। बजट 2026 का यह वित्तीय बूस्टर डोज छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ सुरक्षा बल निर्णायक जंग लड़ रहे हैं। इस रणनीतिक आवंटन से यह स्पष्ट है कि सरकार नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के लिए किसी भी वित्तीय कमी को आड़े नहीं आने देगी।

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