RRT News Raipur: छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA - रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सीधे-साधे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक बेहद सख्त और बड़ी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने राजधानी रायपुर और प्रदेश के रियल एस्टेट मार्केट में हड़कंप मचाते हुए “गोदरेज प्रॉपर्टीज रेसिडेंशियल प्लॉट्स” परियोजना के प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का भारी-भरकम आर्थिक दंड (जुर्माना) ठोक दिया है। इसके साथ ही रेरा ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है कि जब तक इस परियोजना को विधिवत रेरा पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक वहां किसी भी प्रकार के प्लॉटों के क्रय-विक्रय, एडवांस बुकिंग या बिक्री से जुड़ी किसी भी गतिविधि को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए।
प्राधिकरण द्वारा की गई इस स्वतः संज्ञान और गहन जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि संबंधित प्रमोटर ने भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 3(1) के अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया है। प्रमोटर ने अपनी इस नई आवासीय प्लॉटिंग परियोजना का रेरा में बिना कोई अनिवार्य पंजीयन कराए ही, बेहद शातिर तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम) और अन्य विज्ञापन माध्यमों से प्लॉटों की कीमतों, आकर्षक ऑफर्स तथा परियोजना से संबंधित भ्रामक जानकारियों का धड़ल्ले से प्रचार-प्रसार और विज्ञापन शुरू कर दिया था।
रेरा अधिनियम के कड़े दिशा-निर्देशों और कानूनी व्यवस्था के अनुसार, देश या राज्य के किसी भी हिस्से में किसी भी रियल एस्टेट परियोजना (चाहे वह प्लॉट हो या फ्लैट) का वैध पंजीयन कराए बिना उसका कोई भी विज्ञापन, विपणन (मार्केटिंग) या विक्रय कार्य नहीं किया जा सकता। CGRERA प्राधिकरण ने नामी बिल्डर द्वारा किए गए इस वैधानिक उल्लंघन को बेहद गंभीर और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला माना है। इसके बाद रेरा अधिनियम की धारा 59 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का यह दंडात्मक जुर्माना लगाया गया है। इस बड़ी कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा हो, रेरा के नियमों की अनदेखी करने वाले बिल्डर्स और कॉलोनाइजर्स को बख्शा नहीं जाएगा।







