Raipur : छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने किसानों के हित में बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए धान खरीदी की समय सीमा को दो दिन के लिए और बढ़ा दिया है। अब प्रदेश के किसान 4 और 5 फरवरी को भी अपनी उपज उपार्जन केंद्रों में जाकर बेच सकेंगे। पूर्व में धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी से बढ़ाकर 4 फरवरी की गई थी, लेकिन किसानों की भारी मांग और शेष बचे टोकनों को देखते हुए सरकार ने इसे अब 5 फरवरी तक विस्तार देने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य का एक भी पात्र किसान धान बेचने से वंचित न रहे, यह हमारी सरकार की प्राथमिकता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और तकनीकी कारणों से सर्वर की समस्या के चलते कई किसान अपना धान नहीं बेच पाए थे। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखी जाएं।
खाद्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन किसानों को पहले टोकन जारी किए जा चुके हैं और जो तकनीकी कारणों से अपना धान नहीं तौल पाए थे, उन्हें इन दो दिनों में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही नए दिशा-निर्देशों में धान खरीदी केंद्रों को निर्देशित किया गया है कि वे धान का उठाव और भंडारण भी तेजी से सुनिश्चित करें ताकि किसानों को अपनी ट्राली खाली करने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
छत्तीसगढ़ में इस साल धान खरीदी के पिछले सभी रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। सरकार ने इस वर्ष 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया है, जिसका किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। तिथि बढ़ने से विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होगा जो परिवहन या अन्य समस्याओं के कारण समय पर केंद्रों तक नहीं पहुंच सके थे।
सरकार के इस फैसले का किसान संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि तिथि बढ़ने से न केवल किसानों को अपनी मेहनत की कमाई का सही दाम मिलेगा, बल्कि बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर धान बेचने की मजबूरी भी खत्म होगी। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे बढ़ी हुई समय सीमा का लाभ उठाएं और शांतिपूर्वक तरीके से केंद्रों पर पहुंचकर अपनी उपज की बिक्री करें।



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