रायपुर: पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने छत्तीसगढ़ के ईंधन बाजार में खलबली मचा दी है। पिछले दो दिनों से राज्य के बालोद, धमतरी, जगदलपुर और गुरुर समेत कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। वैश्विक युद्ध की आशंका के चलते लोगों के बीच यह अफवाह फैल गई है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति ठप हो सकती है या कीमतें आसमान छू सकती हैं। इस 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) की वजह से कई छोटे और मझोले पेट्रोल पंपों पर स्टॉक समय से पहले ही खत्म हो गया है, जिससे स्थिति और गंभीर नजर आ रही है।
स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक कृत्रिम संकट है जो केवल अफवाहों और डर के कारण पैदा हुआ है। डिपो से आपूर्ति निरंतर जारी है, लेकिन सामान्य दिनों की तुलना में अचानक मांग में 3 से 4 गुना बढ़ोतरी होने के कारण लॉजिस्टिक्स और रिफिलिंग में समय लग रहा है। बालोद और धमतरी जैसे जिलों में स्थिति यह है कि कई पंपों पर 'स्टॉक खत्म' के बोर्ड लगाने पड़े हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में कृषि कार्यों के लिए डीजल की किल्लत महसूस की जा रही है।
सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा ईंधन का भंडारण न करें। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पेट्रोल पंपों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी संचालक कालाबाजारी न करे। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक भंडार है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। फिलहाल, रायपुर और बड़े शहरों में तेल कंपनियों ने अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की है ताकि स्थिति को जल्द ही सामान्य किया जा सके।





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