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छत्तीसगढ़ में जमीन के फेर में अटकी 'गोधाम योजना': रायपुर-बिलासपुर समेत कई जिलों में जगह की भारी किल्लत, बेसहारा मवेशियों का संकट बरकरार

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में आवारा और बेसहारा पशुओं के संरक्षण के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी 'गोधाम योजना' फिलहाल जमीन के इंतजार में ठप पड़ती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत पूरे प्रदेश में कुल 1,460 गोधाम स्थापित करने का एक बड़ा और व्यापक लक्ष्य तय किया है। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर जमीन आवंटन (Land Allotment) की बेहद धीमी और कछुआ गति के कारण यह योजना धरातल पर वैसी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है, जैसी सरकार को उम्मीद थी।

बड़े शहरों में जगह की भारी किल्लत, लक्ष्य से पीछे विभाग
सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार बढ़ रही बेसहारा मवेशियों की गंभीर समस्या को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड (ब्लॉक) में 10-10 गोधाम खोलने की योजना तैयार की थी। लेकिन राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर और दुर्ग समेत राज्य के कई प्रमुख व घनी आबादी वाले जिलों में इस परियोजना के लिए पर्याप्त और उपयुक्त सरकारी जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है। नगरीय और ग्रामीण निकायों के पास पर्याप्त गोचर या खाली भूमि न होने के कारण अधिकारियों को गोधामों के निर्माण के लिए साइट फाइनल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों पर हादसों का डर, जल्द समाधान की जरूरत
गोधामों के निर्माण में हो रही इस प्रशासनिक देरी का सीधा असर आम जनता और बेसहारा पशुओं दोनों पर पड़ रहा है। उचित आश्रय स्थल न होने के कारण हजारों मवेशी दिन-रात हाइवे और शहरों की मुख्य सड़कों पर डेरा जमाए रहते हैं, जिससे आए दिन गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासनों को आपसी समन्वय बनाकर प्राथमिकता के आधार पर भूमि चिन्हित करनी चाहिए, ताकि गोधामों का निर्माण जल्द शुरू हो सके और इस समस्या का स्थायी समाधान निकले।







