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आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को मिलेगी बड़ी राहत: केस वापसी के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बनाएगी 'स्पेशल कमेटी'

RRT News - छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सक्रिय रहे और अब मुख्यधारा में लौट चुके माओवादियों के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। शासन अब उन नक्सलियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तेज करने जा रहा है जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। इसके लिए एक विशेष कमेटी (Special Committee) का गठन किया जाएगा, जो कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच करेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास को सुगम बनाना और उन्हें बिना किसी कानूनी डर के समाज में घुलने-मिलने का अवसर देना है।

रामधर और पापाराव: 1 करोड़ के इनामी और कानूनी पेच
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक चर्चा 1 करोड़ रुपये के इनामी रहे रामधर और पापाराव जैसे बड़े नक्सलियों की हो रही है। इन दोनों ने भारी दबाव और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडर तो कर दिया है, लेकिन इनके खिलाफ दर्ज गंभीर मामलों (जैसे हत्या और विस्फोट) ने कानूनी पेच फंसा दिया है। चूंकि इन पर कई जघन्य अपराधों के आरोप हैं, इसलिए सामान्य प्रक्रिया के तहत इनके केस वापस लेना चुनौतीपूर्ण है। विशेष कमेटी इन्हीं तकनीकी और कानूनी अड़चनों को दूर करने का रास्ता तलाशेगी।
विशेष कमेटी की कार्यप्रणाली और भूमिका
प्रस्तावित कमेटी में गृह विभाग, पुलिस प्रशासन और कानून विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की संभावना है। यह कमेटी प्रत्येक मामले का केस-टू-केस (Case-to-case) आधार पर विश्लेषण करेगी। कमेटी यह देखेगी कि किन मामलों को जनहित और शांति व्यवस्था के मद्देनजर वापस लिया जा सकता है और किन मामलों में कानूनी कार्यवाही जारी रखना आवश्यक है। विशेष रूप से उन मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी जो केवल वैचारिक विरोध या छोटे अपराधों से जुड़े हैं, ताकि सरेंडर करने वाले युवाओं का भविष्य संवर सके।
शांति और विश्वास बहाली की कोशिश
सरकार के इस फैसले को बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली की एक रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सरेंडर कर चुके बड़े चेहरों को कानूनी राहत मिलती है, तो इससे जंगलों में सक्रिय अन्य माओवादियों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। यह पहल न केवल पुराने मामलों को सुलझाएगी, बल्कि माओवादियों के मन में सरकार के प्रति विश्वास पैदा कर उन्हें बंदूक छोड़ने के लिए प्रेरित करने में एक 'माइलस्टोन' साबित हो सकती है।







