छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court) के लिए न्यायपालिका के गलियारों से एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कार्यरत पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों (Additional Judges) को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब इन जजों की सेवाएं स्थायी हो जाएंगी, जिससे हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कॉलेजियम की इस सिफारिश में उन न्यायाधीशों के नाम शामिल हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बेहतरीन न्यायिक दक्षता और निष्पक्षता का परिचय दिया है। नियमानुसार, अतिरिक्त न्यायाधीशों के कामकाज की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम उन्हें स्थायी करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजता है। केंद्र से हरी झंडी मिलने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद संबंधित जजों को स्थायी रूप से शपथ दिलाई जाती है। यह प्रक्रिया न्यायपालिका की मजबूती और निरंतरता के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की कमी को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में जजों के स्वीकृत पदों और रिक्तियों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में यह एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। स्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति से पीठ (Bench) की स्थिरता बढ़ती है, जिससे दीर्घकालिक कानूनी व्याख्याओं और जटिल मुकदमों की सुनवाई में निरंतरता बनी रहती है। बिलासपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं और कानून विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
इस नियुक्ति के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या में तो बदलाव नहीं होगा, लेकिन 'स्थायी' जजों का कोटा बढ़ जाएगा। यह राज्य की न्याय व्यवस्था के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ के न्यायिक ढांचे को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी। आने वाले दिनों में राजभवन में औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है, जहां ये पांचों जज अपने नए दायित्व की शपथ लेंगे।








