Raipur: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में पदस्थ NHM (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के जिला डाटा मैनेजर को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। लोकायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि वह एक लंबित भुगतान या किसी आधिकारिक कार्य के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था, जिसकी शिकायत पीड़ित ने लोकायुक्त मुख्यालय में की थी।
जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही डाटा मैनेजर ने रिश्वत की पहली किस्त स्वीकार की, टीम ने उसे दबोच लिया। आरोपी के हाथ धुलाने पर वे गुलाबी हो गए, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि उसने केमिकल युक्त नोटों को छुआ था। यह कार्रवाई सीधे CMHO कार्यालय परिसर के भीतर की गई, जिससे यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार करने वाले अब सरकारी दफ्तरों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं। लोकायुक्त की टीम ने मौके से जरूरी दस्तावेज और आरोपी का मोबाइल फोन भी ज़ब्त किया है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि डाटा मैनेजर काफी समय से पीड़ित को परेशान कर रहा था और पैसे न देने पर काम रोकने की धमकी दे रहा था। पीड़ित ने परेशान होकर लोकायुक्त पुलिस जबलपुर की शरण ली, जिसके बाद इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। पकड़े गए अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त की टीम अब आरोपी के घर और अन्य ठिकानों पर भी दबिश देने की तैयारी कर रही है ताकि उसकी आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया जा सके।
छिंदवाड़ा में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर कर दी हैं। स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की धांधली ने आम जनता और विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया है। जिला प्रशासन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी अधिकारी के निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका अभियान जारी रहेगा और जनता से अपील की है कि यदि कोई भी लोक सेवक रिश्वत मांगता है, तो वे निडर होकर इसकी शिकायत करें।



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