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मासूमियत पर प्रहार: आम तोड़ने की सजा 'मौत' के बराबर! अब न्याय की गुहार लगा रहे परिवार को मिल रही धमकियां

Chhattisgarh RRT News Desk 23 March 2026

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बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार रवान ग्रामीण इलाके से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां महज कुछ आम तोड़ने के विवाद में एक मासूम बच्चे को बेरहमी से जमीन पर पटक दिया गया। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में आक्रोश व्याप्त है। घटना के बाद पीड़ित बच्चा गंभीर रूप से घायल है और उसे स्थानीय अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। पुलिस ने प्रारंभिक शिकायत के आधार पर मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन आरोपी की रसूखदारी अब जांच और न्याय की प्रक्रिया में रोड़ा बनती दिख रही है।

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ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित परिवार अब एक नई मुसीबत का सामना कर रहा है। आरोप है कि आरोपी पक्ष और उनके समर्थकों द्वारा परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे इस मामले को रफा-दफा कर दें और अपनी शिकायत वापस ले लें। गरीब और असहाय परिवार का कहना है कि उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे वे अब अपने ही घर में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। न्याय की उम्मीद में थाने पहुंचे परिजनों को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं पैसे और रसूख के आगे उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबा न दिया जाए।

इस मामले में बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि एक छोटे से बच्चे के साथ इस तरह का हिंसक व्यवहार न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि समाज की गिरती मानसिकता का परिचायक भी है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पुलिस प्रशासन को पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए और आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी मासूम ऐसे जुल्म का शिकार न बने।

फिलहाल, पुलिस प्रशासन का दावा है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, जमीन पर सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है, जहां पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर तबके की सुरक्षा और बाल अधिकारों के संरक्षण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस दबाव को दरकिनार कर उस मासूम बच्चे को न्याय दिला पाता है या नहीं।

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