बालोद-छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के चिखलाकसा से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहाँ काम के दौरान एक निर्माण श्रमिक (मिस्त्री) की जान चली गई। जानकारी के अनुसार, एक दो मंजिला इमारत पर काम करते समय संतुलन बिगड़ने से मिस्त्री अचानक नीचे गिर गया। बदकिस्मती से, गिरते समय वह पास से गुजर रही हाई-वोल्टेज बिजली की लाइन की चपेट में आ गया। गिरने की चोट और करंट के भीषण झटके ने उसे संभलने का मौका तक नहीं दिया और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और क्षेत्र के श्रमिकों में मातम पसरा है।
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने बताया कि सब कुछ पलक झपकते ही हो गया। मिस्त्री दो मंजिला बिल्डिंग की छत के किनारे पर काम कर रहा था, तभी पैर फिसलने से वह सीधे नीचे की ओर गिरा। बिल्डिंग के करीब से ही बिजली के नंगे तार गुजर रहे थे, जिनसे टकराते ही जोरदार स्पार्क हुआ और करंट ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। वहां मौजूद लोग जब तक बिजली आपूर्ति बंद करवा पाते या उसे बचाने की कोशिश करते, तब तक करंट ने अपना काम कर दिया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुँची।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का लग रहा है। अक्सर देखा जाता है कि ऊंची इमारतों पर काम करते समय श्रमिकों को सुरक्षा बेल्ट या जाली जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं दी जातीं, जिसके कारण इस तरह के जानलेवा हादसे होते हैं। साथ ही, रिहायशी इलाकों में मकानों के एकदम करीब से गुजरते बिजली के तार भी एक बड़ा खतरा बने हुए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस हादसे के लिए भवन मालिक या ठेकेदार की लापरवाही जिम्मेदार है।
इस घटना ने एक बार फिर दिहाड़ी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक अपने परिवार का एकमात्र सहारा था, जिसकी अचानक मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के कड़े नियम लागू किए जाएं। फिलहाल, पुलिस की टीम चिखलाकसा में मामले की विस्तृत जांच कर रही है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि हादसे की असली वजह का पता लगाया जा सके।







