रायपुर | छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय जनगणना अभियान 2026-27 की औपचारिक शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में स्वयं की 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) कर इस महाभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश और राज्य के सुनियोजित विकास और उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
मुख्यमंत्री की अपील: "सटीक जानकारी, बेहतर भविष्य"
अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि:
"जनगणना से प्राप्त आंकड़े ही यह तय करते हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की योजनाएं कहाँ और कितनी प्रभावी होंगी। नागरिकों द्वारा दी गई सटीक जानकारी ही सरकार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने में मदद करती है।"
पहली बार 'स्व-गणना' का विकल्प
इस बार की जनगणना कई मायनों में आधुनिक है। डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नागरिकों को यह सुविधा दी गई है कि वे प्रगणकों (Enumerators) के घर आने से पहले स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
अभियान से जुड़ी मुख्य बातें:
डिजिटल माध्यम: यह छत्तीसगढ़ की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है, जिसे मोबाइल ऐप और पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
मकान सूचीकरण (Phase 1): पहले चरण में मकानों की गिनती और उनकी स्थिति का विवरण लिया जाएगा।
डेटा सुरक्षा: सरकार ने आश्वस्त किया है कि नागरिकों द्वारा साझा की गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी।
विकास की नीतियों का बनेगा ब्लूप्रिंट
जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य के लिए यह जनगणना डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे राज्य में नई तहसीलों, जिलों के गठन और आरक्षण नीतियों के क्रियान्वयन में सटीकता आएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सुदूर वनांचलों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस अभियान को सुचारू रूप से संचालित करें ताकि कोई भी नागरिक इस गणना से वंचित न रहे।








