छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत हुए चर्चित जमीन मुआवजा घोटाले की आंच अब धमतरी जिले तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने आज सुबह कुरुद के सरोजिनी चौक स्थित भूपेंद्र चंद्राकर के आवास पर अचानक दबिश दी। भूपेंद्र चंद्राकर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के करीबी बताए जाते हैं, जिससे इस कार्रवाई ने राज्य की सियासत में एक बार फिर गर्माहट ला दी है।
क्या है पूरा मामला?
भारतमाला परियोजना के लिए की गई जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच ईडी काफी समय से कर रही है। आरोप है कि मुआवजे की राशि हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, जमीनों के टुकड़े किए गए और मृत व्यक्तियों के नाम पर भी मुआवजा उठाया गया। इस मामले में पहले भी कई बड़े नाम सामने आ चुके हैं, और अब जांच का दायरा बढ़ते हुए कुरुद तक पहुंच गया है।
बंद दरवाजे के पीछे जांच
एक्शन: सुबह तीन गाड़ियों में सवार होकर 12 से अधिक ईडी अधिकारियों की टीम भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंची।
घेराबंदी: सुरक्षा के मद्देनजर सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों को तैनात किया गया है। घर को अंदर से लॉक कर टीम गहन दस्तावेज खंगाल रही है ताकि सबूतों को सुरक्षित रखा जा सके।
तलाश: टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि मुआवजा वितरण में उनकी क्या भूमिका रही और क्या वे इस घोटाले के कथित लाभार्थियों में शामिल हैं।
सियासी सरगर्मी तेज
इस कार्रवाई के साथ ही अभनपुर और अन्य इलाकों में भी ईडी की सक्रियता देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस छापेमारी को लेकर काफी चर्चा है। हालांकि, ईडी की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर छापेमारी की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन घर के अंदर चल रही जांच से यह स्पष्ट है कि एजेंसी के हाथ कुछ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं।








