छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी को लेकर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। रेलवे बजट में छत्तीसगढ़ के लिए 24 गुना की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है, जिससे प्रदेश में रेलवे विस्तार की परियोजनाओं को पंख लग गए हैं। इस भारी-भरकम बजट आवंटन का मुख्य उद्देश्य राज्य के दूरदराज के इलाकों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाना है।
इस निवेश का सबसे बड़ा असर पैसेंजर ट्रेनों की संख्या पर पड़ने वाला है। रेल विभाग की योजना के अनुसार, अगले दो वर्षों के भीतर छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली और यहाँ से चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों की संख्या वर्तमान की तुलना में दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल दैनिक यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
बजट का बड़ा हिस्सा नई रेल लाइनों के निर्माण, मौजूदा ट्रैक के दोहरीकरण और प्रमुख स्टेशनों के पुनर्विकास (Amrit Bharat Station Scheme) पर खर्च किया जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के तहत आने वाले छत्तीसगढ़ के विभिन्न रेल खंडों में आधुनिकीकरण का काम युद्धस्तर पर जारी है। ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने के साथ-साथ वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के विस्तार पर भी फोकस किया जा रहा है।
रेलवे के इस बढ़ते दायरे से छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भी विकास के नए द्वार खुलेंगे। जानकारों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में इस ऐतिहासिक निवेश से प्रदेश में माल ढुलाई और यात्री परिवहन की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। आने वाले दो साल छत्तीसगढ़ के रेल इतिहास में एक बड़े परिवर्तनकारी युग के रूप में दर्ज होंगे।



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