छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में सरकारी भर्तियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव का निर्णय लिया है। अब युवाओं को अलग-अलग विभागों की समान योग्यता वाली नौकरियों के लिए बार-बार आवेदन करने और अलग-अलग परीक्षाएं देने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने विभिन्न पदों के लिए 'संयुक्त पात्रता परीक्षा' (Combined Exam) आयोजित करने की योजना बनाई है। इस कदम से न केवल परीक्षार्थियों का समय बचेगा, बल्कि बार-बार भरे जाने वाले परीक्षा शुल्कों के आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी।
कैसे काम करेगा यह नया 'वन एग्जाम' मॉडल?
इस नई व्यवस्था के तहत, एक जैसी शैक्षणिक योग्यता वाले पदों (जैसे- स्नातक स्तर या 12वीं स्तर) के लिए एक ही कॉमन एंट्रेंस टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर एक 'मेरिट लिस्ट' तैयार की जाएगी। इसके बाद, विभिन्न विभाग अपनी रिक्तियों के अनुसार इसी मेरिट लिस्ट से उम्मीदवारों का चयन करेंगे। कुछ विशिष्ट पदों के लिए मुख्य परीक्षा या कौशल परीक्षा (Skill Test) अलग से ली जा सकती है, लेकिन प्रारंभिक चयन प्रक्रिया अब एकीकृत होगी।
भर्ती प्रक्रिया में आएगी तेजी और पारदर्शिता
अक्सर देखा गया है कि अलग-अलग विभागों की भर्ती प्रक्रिया में सालों लग जाते हैं और परीक्षाएं आपस में टकराती हैं। नई व्यवस्था से:
भर्ती कैलेंडर: राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) और व्यापम (CG Vyapam) एक निश्चित कैलेंडर के अनुसार परीक्षाएं करा सकेंगे।
समय की बचत: एक ही बार विज्ञापन निकलने और परीक्षा होने से चयन प्रक्रिया 6 से 9 महीने के भीतर पूरी की जा सकेगी।
पारदर्शिता: एकीकृत सिस्टम होने से पेपर लीक और धांधली जैसी शिकायतों पर अंकुश लगाने में आसानी होगी।
मुख्यमंत्री का युवाओं को तोहफा: 'विकसित छत्तीसगढ़' की ओर कदम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार का यह फैसला राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के हित में माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को उनके गृह जिले के पास ही परीक्षा केंद्र मिले और भर्ती प्रक्रिया इतनी सरल हो कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा को प्रशासनिक देरी के कारण ओवरएज (आयु सीमा पार) न होना पड़े। शिक्षाविदों और छात्र संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, इसे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक सुधारों में एक मील का पत्थर बताया जा रहा है।







