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ईरान के चाबहार पोर्ट पर भारत ने थामी रफ्तार: अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ के दबाव में लिया बड़ा फैसला

Entertainment 16 January 2026 (99)

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भारत ने ईरान स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) पर अपने परिचालन को काफी हद तक सीमित या बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और हालिया टैरिफ नीतियों के बाद उठाया गया है। भारत के लिए यह एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि चाबहार पोर्ट को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुँचने के लिए पाकिस्तान के रास्ते का एक वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग माना जाता था। अमेरिकी प्रशासन के सख्त रुख ने भारत को अपनी निवेश और परिचालन रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

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इस फैसले के पीछे मुख्य कारण वाशिंगटन से मिल रहे संकेत और अमेरिकी प्रतिबंधों का डर है। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन और नई आर्थिक नीतियों के लागू होने के बाद, ईरानी संस्थाओं के साथ व्यापार करना भारतीय कंपनियों के लिए जोखिम भरा हो गया है। प्रतिबंधों के कारण न केवल भुगतान प्रणालियों (Payment Channels) में बाधा आ रही है, बल्कि जो कंपनियां ईरान के साथ जुड़ी हैं, उन पर अमेरिकी बाजारों में काम करने पर पाबंदी लगने का खतरा मंडरा रहा है। भारत अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका के साथ संबंधों को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल इस प्रोजेक्ट से पीछे हटता दिख रहा है।

चाबहार बंदरगाह का विकास भारत के लिए केवल व्यापारिक ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण था। यह बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, जिसे चीन द्वारा विकसित किया जा रहा है, के जवाब के रूप में देखा जाता था। भारत ने यहाँ टर्मिनल विकसित करने और बुनियादी ढांचे के लिए करोड़ों डॉलर का निवेश किया था। लेकिन अब काम बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) की गति भी धीमी पड़ने की आशंका है, जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ने का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।

ईरान और भारत के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर पिछले कई वर्षों से बातचीत और समझौते चल रहे थे। भारत ने पिछले साल ही चाबहार के प्रबंधन के लिए 10 साल के दीर्घकालिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीति में आए बदलावों और अमेरिका के 'टैरिफ युद्ध' ने समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत नहीं चाहता कि ईरान के साथ उसके सहयोग के कारण अमेरिका उस पर किसी भी प्रकार के द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) लगाए, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और डॉलर के व्यापार पर बुरा असर पड़े।

फिलहाल, चाबहार पर काम रुकने से मध्य एशिया में भारत के प्रभाव पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर भारत इसे 'अस्थायी ठहराव' के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है ताकि भविष्य में स्थिति सुधरने पर फिर से वापसी की जा सके। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक व्यापार में बड़े देशों के प्रतिबंध और आपसी खींचतान किस तरह से विकासशील देशों के रणनीतिक प्रोजेक्ट्स को प्रभावित करते हैं। अब भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और कनेक्टिविटी के लिए वैकल्पिक मार्गों और नई कूटनीति पर काम करना होगा।

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