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ईरान में मौत का तांडव: 5,000 से ज्यादा लोगों की मौत, 500 सुरक्षाकर्मी भी ढेर; 'इस्लामिक क्रांति' के बाद सबसे बड़ा नरसंहार....

तेहरान/दुबई: ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब तक का सबसे खौफनाक रूप ले लिया है। एक ईरानी अधिकारी द्वारा रविवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी उथल-पुथल में अब तक 5,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि मृतकों में लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह ईरान की अब तक की सबसे घातक और हिंसक अशांति मानी जा रही है, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है।

यह विद्रोह दिसंबर 2025 के अंत में बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल गया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि 'कई हजार' लोग मारे गए हैं। हालांकि, उन्होंने इस हिंसा के लिए विदेशी ताकतों, विशेष रूप से अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का दावा है कि प्रदर्शनों की आड़ में 'हथियारबंद आतंकवादियों' ने निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया है।
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टें इससे भी अधिक भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं। सीबीएस न्यूज और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 12,000 से 20,000 के बीच हो सकती है। इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद ईरान के अंदर से आ रहे वीडियो और गवाहियां जेलों में भीड़ और अस्पतालों में लाशों के ढेर होने की पुष्टि कर रहे हैं। विशेष रूप से कुर्दिस्तान और उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधा हमला किया है।
इस मानवीय संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रदर्शनकारियों का नरसंहार और सामूहिक फांसी नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस लगातार ईरान की नई लीडरशिप की मांग कर रहा है और ताजा प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है। इस बीच, रूस ने बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी देते हुए मध्यस्थता की पेशकश की है, जिससे यह मुद्दा अब एक बड़े वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।
फिलहाल, ईरान के कई शहरों में भारी सुरक्षा बल तैनात है और सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन अंदर ही अंदर आक्रोश की लहर अभी भी बरकरार है। स्कूल और कॉलेज धीरे-धीरे खुल रहे हैं, लेकिन इंटरनेट पर पाबंदी जारी है। दुनिया भर की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं कि क्या यह विरोध प्रदर्शन किसी स्थायी बदलाव की ओर बढ़ेंगे या फिर इन्हें पूरी तरह कुचल दिया जाएगा।







