अमेरिका इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े नागरिक विद्रोह का गवाह बन रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, विशेषकर ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और देश में बेतहाशा बढ़ती महंगाई के खिलाफ पूरे अमेरिका में 80 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए हैं। 'नो किंग्स' (No Kings) नामक इस आंदोलन के तहत अमेरिका के सभी 50 राज्यों में लगभग 3,300 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। वाशिंगटन डीसी से लेकर न्यूयॉर्क और शिकागो तक, प्रदर्शनकारियों ने हाथ में बैनर लिए "लोकतंत्र बचाओ" और "युद्ध बंद करो" के नारे लगाए।
इस व्यापक प्रदर्शन की मुख्य वजह ईरान युद्ध में अमेरिका की बढ़ती संलिप्तता और उससे उपजा आर्थिक संकट है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम अमेरिकी नागरिक महंगाई की मार झेल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लोग इस बात से नाराज हैं कि अरबों डॉलर जनहित के बजाय युद्ध में झोंके जा रहे हैं। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और अन्य प्रमुख शहरों में हुई रैलियों में मशहूर हस्तियों और राजनेताओं ने भी हिस्सा लिया, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
सुरक्षा के लिहाज से पूरे अमेरिका में हाई अलर्ट जारी है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़पें भी देखने को मिलीं। वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बेहद करीब तक पहुंच गए, जिसके बाद सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह ऐतिहासिक मार्च ट्रंप सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि मांग केवल युद्ध रोकने की नहीं बल्कि राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने (Impeachment) तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर #NoKings और #StopTheWar ट्रेंड कर रहा है।







