RRT News- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले आरंग में संस्कृति विभाग को एक महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल हुई है। विभाग के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की टीम को क्षेत्र में अन्वेषण के दौरान लगभग 100 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां (Manuscripts) प्राप्त हुई हैं। इन पांडुलिपियों का मिलना क्षेत्र के ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व को एक नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है। विभाग अब इन दस्तावेजों के संरक्षण और इनमें दर्ज लिपि के अध्ययन की तैयारी कर रहा है।
आरंग हमेशा से ही अपने प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता रहा है। मिली हुई पांडुलिपियों की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि ये उस दौर के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये हस्तलिखित दस्तावेज छत्तीसगढ़ी या उस समय की प्रचलित स्थानीय लिपि में हो सकते हैं, जिनमें प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों, मंत्रों या तत्कालीन शासन व्यवस्था का विवरण होने की संभावना है।
संस्कृति विभाग इन दुर्लभ पांडुलिपियों को रायपुर स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखने की योजना बना रहा है। इन दस्तावेजों के मिलने से इतिहासकारों और शोधकर्ताओं में उत्साह का माहौल है, क्योंकि ये छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास की खोई हुई कड़ियों को जोड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं। आने वाले समय में इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भी किया जा सकता है ताकि भावी पीढ़ी और शोधकर्ता इनका लाभ उठा सकें।







