RAIPUR CRIME : अभनपुर। मामले की शुरुआत कुछ अनजान कॉल्स से हुई, जिन्होंने प्रार्थी की रातों की नींद उड़ा दी। उसे फोन पर धमकी मिली कि सतर्कता विभाग और ACB में उसके खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज है। घबराहट में प्रार्थी ने अपने सबसे भरोसेमंद पुराने साथी, जगदलपुर के टेंट व्यवसायी धर्मेंद्र चौहान से मदद मांगी। उसे क्या पता था कि जिस कंधे पर वह सिर रखकर मदद मांग रहा है, असली शिकारी वही है। धर्मेंद्र ने प्रार्थी की घबराहट को भांप लिया और वहीं से शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग और ठगी का वह खतरनाक खेल, जिसने प्रार्थी को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया।
नकली अफसर और लेडी पार्टनर का कनेक्शन
धर्मेंद्र ने बड़ी चालाकी से प्रार्थी को अनजान नंबर ब्लॉक करने की सलाह दी ताकि वह सीधे किसी के संपर्क में न आ सके। इसके बाद शुरू हुआ असली ड्रामा; आरोपी ने अपनी एक महिला मित्र के नाम पर ली गई सिम का इस्तेमाल कर खुद को EOW का बड़ा अधिकारी बताया। उसने प्रार्थी को व्हाट्सएप पर फर्जी शिकायत की कॉपी भेजकर जेल जाने का ऐसा डर दिखाया कि प्रार्थी के हाथ-पांव फूल गए। हमदर्द बनने का नाटक करते हुए धर्मेंद्र ने बीच-बचाव का झांसा दिया और मामला रफा-दफा करने के लिए 10 लाख रुपये की डिमांड रख दी, जिसमें से 9.50 लाख उसने वसूल भी लिए।
पुलिस की रेड और मास्टरमाइंड का अंत
जब शक की सुई घूमी और मामला राखी थाना पहुंचा, तो पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए इस पूरे मकड़जाल की परतें उधेड़ना शुरू किया। जांच में खुलासा हुआ कि जिस 'बड़े अफसर' से प्रार्थी डर रहा था, वह कोई और नहीं बल्कि उसका अपना दोस्त धर्मेंद्र ही था। पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा और उसके पास से वह मोबाइल भी बरामद कर लिया, जिससे वह फर्जी कॉल और मैसेज करता था। पुलिस ने अब आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है और नागरिकों को आगाह किया है कि किसी के भी झांसे में आकर अपना सिम कार्ड दूसरों को न दें।








