RRT News- कभी नक्सलवाद के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर की तस्वीर अब सुरक्षा और सेवा के समन्वय से बदलने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की नई रणनीति के तहत, बस्तर के दूरस्थ अंचलों में स्थित सुरक्षा कैंप (Forward Operating Bases) अब केवल सैन्य ऑपरेशनों के केंद्र नहीं रहेंगे। इन्हें 'जन सुविधा केंद्रों' के रूप में विकसित किया जाएगा, जो सुरक्षाबलों और स्थानीय आदिवासियों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेंगे। इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 मई 2026 को नेतनार सीआरपीएफ कैंप से रखने जा रहे हैं।
इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य 'बस्तर 2.0' के विजन को धरातल पर उतारना है। इन कैंपों के माध्यम से ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं, राशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और बैंकिंग जैसी बुनियादी जरूरतें उनके घर के पास ही उपलब्ध कराई जाएंगी। गृहमंत्री अमित शाह का यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि वे शहीद गुंडाधुर की पावन धरती नेतनार में न केवल जवानों के साथ समय बिताएंगे, बल्कि ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनके सुझाव भी सुनेंगे। यह कदम इस बात का प्रतीक है कि बस्तर अब "बंदूक" से "विकास" की ओर पूरी तरह मुड़ चुका है।
नेतनार गांव, जो कभी नक्सलियों का अजेय किला माना जाता था, आज शांति का नया संदेश दे रहा है। अमित शाह के प्रवास को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक तैयारियां की हैं। 18 मई को नेतनार में आदिवासियों से संवाद के बाद, 19 मई को जगदलपुर में 'मध्य क्षेत्रीय परिषद' की 26वीं महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इस बैठक में बस्तर को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के बाद के "पोस्ट-नक्सल" विकास मॉडल पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
सुरक्षा कैंपों की नई भूमिका से बस्तर के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि जब विकास की किरणें कैंपों के माध्यम से सीधे ग्रामीणों तक पहुँचेंगी, तो भटकाव की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। बस्तर में सुरक्षा कैंपों का यह 'मेकओवर' देश के अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक नजीर पेश करेगा। अब बस्तर की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि यहाँ के कैंपों से मिलने वाली जनसुविधाएं और खुशहाली होगी।







