छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से न्याय व्यवस्था की मुस्तैदी की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। अपनी सगी भतीजी की कुल्हाड़ी (टांगी) मारकर निर्मम हत्या करने वाले आरोपी चाचा को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पुलिस की सटीक विवेचना और कोर्ट की सक्रियता के चलते वारदात के महज 10 महीने के भीतर ही दोषी को सजा मिल गई, जो कानून के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करता है।
यह सनसनीखेज वारदात करीब 10 महीने पहले घटित हुई थी, जब आरोपी चाचा ने मामूली घरेलू विवाद या किसी अन्य रंजिश के चलते अपनी मासूम भतीजी पर टांगी से ताबड़तोड़ हमला कर दिया था। इस हमले में युवती की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया था। वारदात के बाद से ही क्षेत्र में काफी तनाव और आक्रोश का माहौल था। पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए चालान पेश किया और चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज कराए।
न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि रिश्तों का कत्ल करने वाला ऐसा कृत्य समाज के लिए कलंक है। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में ठोस डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे आरोपी का बच निकलना नामुमकिन हो गया। बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायाधीश ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड से भी दंडित किया है। पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि हालांकि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अपराधी को मिली इस सख्त सजा से उसे इंसाफ जरूर मिला है।
फास्ट ट्रैक की तरह काम करते हुए कोर्ट ने जिस तरह 10 महीने में फैसला सुनाया है, उसकी चर्चा पूरे प्रदेश के विधिक गलियारों में हो रही है। अक्सर हत्या जैसे मामलों में फैसले आने में सालों लग जाते हैं, लेकिन सरगुजा पुलिस और न्यायपालिका के बीच के समन्वय ने इसे मुमकिन कर दिखाया। कानूनी जानकारों का मानना है कि इतनी जल्दी सजा मिलने से अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा और गंभीर अपराधों में कमी आएगी। वर्तमान में दोषी को जेल भेज दिया गया है।

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