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Wild Elephant Terror: गजराज का 'तांडव'! पानी की तलाश में बस्ती में घुसे 25 हाथी, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, ग्रामीण बेघर

Chhattisgarh RRT News Desk 17 April 2026

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रायगढ़- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों और इंसानों के बीच का संघर्ष अब जानलेवा मोड़ पर पहुँच गया है। भीषण गर्मी के कारण जंगलों में पानी खत्म होने के बाद, गुरुवार को करीब 25 हाथियों का एक विशाल दल प्यास बुझाने के लिए सीधे रिहायशी गांवों में जा धमका। पानी की तलाश में निकले इन हाथियों ने रास्ते में आने वाले खेतों को पूरी तरह रौंद दिया है, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पल भर में मिट्टी में मिल गई। रायगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में इस घुसपैठ के बाद से ग्रामीणों में जबरदस्त खौफ है और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं।

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रायगढ़ वन मंडल के अधिकारियों के अनुसार, यह दल पिछले कुछ दिनों से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। गुरुवार की घटना ने तब तूल पकड़ा जब हाथियों ने पानी के टैंकों और हैंडपंपों के पास पहुँचने की कोशिश की। इस दौरान जो भी फसल या बाड़ उनके रास्ते में आई, हाथियों ने उसे तहस-नहस कर दिया। प्रभावित गांवों के किसानों का कहना है कि उनकी तैयार फसलें अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं। हाथियों के चिंघाड़ और उनके भारी कदमों की आहट से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है, और लोग शाम होते ही अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

वन विभाग की टीम ने रायगढ़ के प्रभावित इलाकों में मुनादी कराकर 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया है। हाथियों के इस दल में शावक भी शामिल हैं, जिसके कारण वे और भी अधिक आक्रामक हो रहे हैं। वन विभाग के गजराज वाहनों और एलीफेंट ट्रैकर्स की मदद से दल को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पानी की कमी उन्हें बार-बार गांवों की ओर खींच ला रही है। विभाग ने ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे हाथियों को भगाने के लिए पटाखे न जलाएं और न ही उनके करीब जाने की कोशिश करें, क्योंकि इससे वे और अधिक हिंसक हो सकते हैं।

इस आपदा ने रायगढ़ के किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलों के नुकसान के साथ-साथ कई कच्चे घरों को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजे और सुरक्षा की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जंगलों के भीतर कृत्रिम जलस्रोतों (Water Holes) की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हाथियों का गांवों की ओर पलायन नहीं रुकेगा। फिलहाल, पूरा जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।

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