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अंबिकापुर: रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो गिरफ्तार, घर पर 'चंगाई सभा' की आड़ में धर्मांतरण कराने का आरोप...

Chhattisgarh RRT News Desk 30 January 2026

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सरगुजा जिले के जिला मुख्यालय अंबिकापुर के नमना कला इलाके में रहने वाले रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो के निवास पर 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के दिन से ही गहमागहमी बनी हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहाँ बिना अनुमति के एक 'चंगाई सभा' (Healing Meeting) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भारी भीड़ जमा है।

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हिंदू संगठनों का विरोध और हंगामा

घटना वाले दिन विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में ओमेगा टोप्पो के घर के बाहर एकत्र हो गए थे। उनका आरोप था कि सभा में ग्रामीण क्षेत्रों से आए गरीब लोगों को प्रलोभन देकर और बीमारियों के इलाज का झांसा देकर उनका मतांतरण (धर्म परिवर्तन) कराया जा रहा है। मौके पर तनाव को देखते हुए गांधीनगर थाना पुलिस और नायब तहसीलदार ने दबिश दी थी।

क्या है पुलिस की जांच और गिरफ्तारी का आधार?

जांच के बाद पुलिस ने पाया कि इस आयोजन के लिए प्रशासन से कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी।

भीड़ और बाहरी लोग: सभा में लगभग 50 से 60 लोग मौजूद थे, जिनमें कुछ हिंदू परिवारों के सदस्य भी शामिल थे।

अवैध धर्मांतरण के साक्ष्य: पुलिस को मौके से कुछ ऐसी सामग्री और गवाह मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिला कि वहाँ मतांतरण की प्रक्रिया चल रही थी।

FIR और गिरफ्तारी: प्राथमिक जांच और स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर पुलिस ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसी कड़ी में आज ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

प्रशासनिक सेवा से जुड़े व्यक्ति पर आरोप से हड़कंप

ओमेगा टोप्पो राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं और डिप्टी कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। एक पूर्व जिम्मेदार अधिकारी के घर पर इस तरह की गतिविधियों के संचालन के आरोप ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की सभाएं पिछले काफी समय से नियमित रूप से आयोजित की जा रही थीं।

इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

गिरफ्तारी के बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए नमना कला और गांधीनगर थाना क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हिंदू संगठनों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से इसे निजी धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बताया जा रहा है।

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