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​"आपकी थाली में 'साइलेंट किलर': दूध और मांस के साथ शरीर में जा रहा एंटीबायोटिक का डोज; बेअसर हो रही हैं जीवन रक्षक दवाइयां"

Chhattisgarh RRT News Desk 15 February 2026

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Raipur: हम जो भोजन बड़े चाव से कर रहे हैं, वह हमें तंदुरुस्त बनाने के बजाय धीरे-धीरे बीमार (Drug Resistant) बना रहा है। हालिया शोध और रिपोर्टों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पशु उत्पादों (दूध, मांस, अंडे) के माध्यम से इंसानों के शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (AMR) तेजी से फैल रहा है। इसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ 'साइलेंट किलर' या 'धीमा जहर' कह रहे हैं, जो भविष्य में सामान्य बीमारियों को भी लाइलाज बना सकता है।

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क्यों और कैसे फैल रहा है यह 'रेजिस्टेंस'?

पशुपालन क्षेत्र में मुनाफे के लिए और पशुओं को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उनकी ग्रोथ बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है।

दवाओं का दुरुपयोग: मुर्गियों और दुधारू पशुओं को बिना किसी गंभीर बीमारी के भी एंटीबायोटिक दिए जाते हैं।

फूड चेन में प्रवेश: जब इंसान इन पशुओं का मांस, दूध या अंडे का सेवन करता है, तो दवाओं के अवशेष (Residues) शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

सुपरबग का जन्म: बार-बार कम मात्रा में शरीर में पहुँचने वाली ये दवाइयां बैक्टीरिया को इतना शक्तिशाली बना देती हैं कि उन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाइयां काम करना बंद कर देती हैं।

बेअसर हो रही हैं जीवन रक्षक दवाइयां

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति रही, तो 2050 तक मामूली संक्रमण से भी लोगों की मौत होने लगेगी।

इलाज में विफलता: वर्तमान में टाइफाइड, निमोनिया और टीबी जैसी बीमारियों के इलाज में डॉक्टरों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि पुरानी दवाइयां मरीजों पर बेअसर साबित हो रही हैं।

सर्जरी में खतरा: ऑपरेशन या कीमोथेरेपी के बाद संक्रमण रोकने के लिए दी जाने वाली दवाइयां भी अब अपना प्रभाव खो रही हैं।

कैसे बचें इस खतरे से?

विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह परहेज तो कठिन है, लेकिन सतर्कता जरूरी है:

ऑर्गेनिक उत्पादों का चयन: जहां तक संभव हो, बिना एंटीबायोटिक वाले (Antibiotic-free) उत्पादों का उपयोग करें।

उचित कुकिंग: मांस और अंडों को अच्छी तरह उच्च तापमान पर पकाकर ही खाएं।

जागरूकता: दूध और अन्य डेयरी उत्पादों के स्रोत की जांच करें।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें: स्वयं भी छोटी-मोटी बीमारियों में एंटीबायोटिक खाने से बचें।

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