Breaking
- Road Repair Alert: कोरबा में सड़कों की मरम्मत तेज करने के निर्देश, निर्माण का...
- Aromatic Rice Farming: सुगंधित धान की खेती से शंकर प्रसाद को मिलेंगे 45 हजार ...
- Sports News: Asian Games 2026 के पदकवीरों से PM मोदी ने की मुलाकात, महिला खिल...
- Raipur News: हल्दी बीज वितरण में अनियमितता, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दिए...
- बाढ़ से बर्बाद किसान सड़क पर उतरे, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी ट्रैक्टरों से जग...
- VB-G RAM G के तकनीकी सहायकों की राज्य स्तरीय हड़ताल, नियमितीकरण की मांग को ले...
- Raigarh News: किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकत...
- Dantewada News: नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण...
- Narayanpur News: वनांचल में उम्मीदों का जल, नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर मे...
- Raipur News: गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन, किसानों को अब 425 रुपय...
सिस्टम में सेंध: मात्र 4500 टका देकर भारत पहुंच रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए, सुरक्षा रिपोर्ट के बावजूद वोटर लिस्ट में नाम दर्ज

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा और पहचान के दावों की पोल खोलती एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि बांग्लादेशी नागरिक मात्र 4500 टका (बांग्लादेशी मुद्रा) देकर एजेंटों के जरिए अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये घुसपैठिए न केवल भारत में बस रहे हैं, बल्कि स्थानीय दलालों की मदद से भारतीय पहचान पत्र और वोटर लिस्ट में अपना नाम भी शामिल करवा रहे हैं।

जांच में एक ऐसा मामला भी सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति जो अवैध रूप से बांग्लादेश से आया था, वह पुलिस में सिपाही के पद तक पहुंचने में कामयाब रहा। यह सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी चूक मानी जा रही है। स्पेशल इंटेलिजेंस रिपोर्ट (SIR) में संदिग्ध गतिविधियों और नागरिकता पर सवाल उठाए जाने के बावजूद, प्रशासनिक ढिलाई के चलते इन लोगों के नाम मतदाता सूची में बरकरार हैं।
घुसपैठ का यह नेटवर्क बेहद संगठित है। सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय एजेंटों का जाल इतना फैला हुआ है कि वे नए आने वालों को न केवल सुरक्षित रास्ता देते हैं, बल्कि उनके लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की व्यवस्था भी करते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि स्थानीय राजनीतिक संरक्षण के चलते इन घुसपैठियों के सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया जाता है ताकि उन्हें भविष्य के "वोट बैंक" के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कई संदिग्धों के खिलाफ इंटेलिजेंस इनपुट होने के बावजूद उन्हें सिस्टम से बाहर करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब तक पुलिस या प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है, तब तक ये घुसपैठिए कोर्ट से स्टे ले लेते हैं या अपनी पहचान पूरी तरह बदल लेते हैं। हालिया जांच में पाया गया कि कई लोग जो बांग्लादेशी जेलों में अपराधी रहे हैं, वे भी भारत में शरण लेकर सामान्य नागरिक की तरह रह रहे हैं।
इस खुलासे के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने केंद्र और राज्य सरकारों से सीमा पर सख्त निगरानी और पहचान पत्रों के डिजिटल सत्यापन की मांग की है। यह मामला न केवल आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि देश के संसाधनों पर भी अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। फिलहाल, उच्च अधिकारियों ने इस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है और उन सरकारी कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी है जिन्होंने बिना उचित जांच के इन घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए।







