छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिला प्रशासन और नगर पालिका की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित लगभग 120 अवैध घरों और निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया। प्रशासन का दावा है कि ये निर्माण सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के किए गए थे और इन्हें हटाने के लिए पूर्व में नोटिस भी जारी किए गए थे।
माओवादी हिंसा पीड़ितों पर भी गिरी गाज
इस बड़ी कार्रवाई ने उस समय विवाद का रूप ले लिया जब यह पता चला कि जमींदोज किए गए घरों में कई घर माओवादी हिंसा के शिकार हुए परिवारों के भी थे। ये वे लोग हैं जिन्होंने नक्सली आतंक के कारण अपने गांव छोड़ दिए थे और शहर के सुरक्षित इलाकों में छोटे-छोटे आशियाने बनाकर रह रहे थे। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें अपना सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कड़ाके की ठंड के बीच उनके सिर से छत छीन ली गई।
आक्रोशित ग्रामीणों का प्रदर्शन
बुलडोजर एक्शन के विरोध में प्रभावित परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों ने जमकर नाराजगी जाहिर की है। पीड़ितों का कहना है कि वे सालों से इन जगहों पर रह रहे हैं और उनके पास पुनर्वास का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि माओवादी हिंसा से प्रताड़ित लोगों को राहत देने के बजाय उन्हें बेघर करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
प्रशासन का पक्ष: नियम सर्वोपरि
दूसरी ओर, जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि शहर के व्यवस्थित विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अतिक्रमण हटाना अनिवार्य था। अधिकारियों के मुताबिक, जिन जगहों से कब्जा हटाया गया है, वे भविष्य में जनहित की परियोजनाओं के काम आएंगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं थे, केवल उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि, हिंसा पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।








