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धमनी गांव में 'नारी शक्ति' की हुंकार: महिला कमांडो ने संभाली जंगल की सुरक्षा, वन संरक्षण के साथ अब इको-टूरिज्म को लगेंगे पंख!

बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पलारी विकासखंड से महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद गौरवशाली और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। चित्रोत्पला महानदी के पावन किनारे पर बसा ग्राम धमनी आज पूरे प्रदेश के लिए सामुदायिक वन संरक्षण का एक बेजोड़ मॉडल बनकर उभरा है। इस गांव की जागरूक महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने मिलकर जंगल को केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि अपनी विरासत और भविष्य मानकर उसकी सुरक्षा का ऐसा बीड़ा उठाया है, जिसने वन संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

इस पूरे अभियान की सबसे खूबसूरत और मजबूत कड़ी यहाँ की 'महिला कमांडो टीम' है। ग्रामीण महिलाओं ने संगठित होकर बकायदा एक कमांडो दल तैयार किया है, जो हाथों में लाठियां लेकर दिन-रात जंगल की सुरक्षा में मुस्तैद रहता है। इन महिला कमांडो की सजगता और कड़े पहरे का ही नतीजा है कि क्षेत्र में अवैध कटाई, लकड़ी तस्करी और वन्यजीवों का शिकार पूरी तरह से थम गया है। महिलाओं के इस अदम्य साहस ने न केवल प्राकृतिक संपदा को जीवंत रखा है, बल्कि लुप्त हो रहे वन्यजीवों को भी एक सुरक्षित आशियाना दिया है।
इको-टूरिज्म और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी
महिलाओं की इस अनूठी पहल से घने और सुरक्षित हो चुके धमनी के इस जंगल को अब एक बड़े पर्यटन केंद्र (इको-टूरिज्म हब) के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रकृति की गोद में बसे इस सुंदर इलाके में जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) बढ़ने से सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। प्रशासन और स्थानीय जनभागीदारी से यहाँ एडवेंचर स्पोर्ट्स, नेचर वॉक और कैंपिंग जैसी गतिविधियों को शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। इससे न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर धमनी गांव को एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि गाइड, होम-स्टे और स्थानीय हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।







