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बीजापुर में प्रशासन का बड़ा एक्शन: DRG दंपती समेत 40 मकानों पर चला बुलडोजर, बेघर हुए परिवारों में नक्सलियों का खौफ

Chhattisgarh RRT News Desk 16 January 2026

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में प्रशासन ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए करीब 40 मकानों को मलबे में तब्दील कर दिया है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के एक दंपती का घर भी ढहा दिया गया। बुलडोजर की इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में मातम का माहौल है और लोग अपने आशियाने को उजड़ता देख बिलखते नजर आए। प्रशासन का कहना है कि ये निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किए गए थे, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

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कार्रवाई के दौरान सबसे हृदयविदारक स्थिति तब देखी गई जब प्रभावित लोग रोते हुए प्रशासन से गुहार लगाते दिखे। बेघर हुए परिवारों का कहना है कि वे सालों से यहां रह रहे थे और अब उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है। प्रभावितों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपना सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। इस कार्रवाई ने कड़ाके की ठंड और अनिश्चित भविष्य के बीच दर्जनों परिवारों को खुले आसमान के नीचे लाकर खड़ा कर दिया है।

मकान टूटने के बाद इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नक्सलियों का खौफ है। प्रभावितों का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों से आकर शहर के सुरक्षित इलाकों में बसे थे ताकि नक्सलियों के कोपभाजन से बच सकें। अब जब प्रशासन ने उनके घर तोड़ दिए हैं, तो उनका कहना है कि यदि वे वापस अपने मूल गांवों की ओर जाते हैं, तो वहां नक्सली उन्हें मार डालेंगे। विशेष रूप से पुलिस और सुरक्षा बलों से जुड़े परिवारों के लिए यह स्थिति और भी अधिक जानलेवा साबित हो सकती है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अवैध कब्जों को हटाने के लिए नियमानुसार नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके थे। अधिकारियों के मुताबिक, विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक था। हालांकि, प्रभावितों का दावा है कि उन्हें बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के इस तरह उजाड़ना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

इस घटना के बाद बीजापुर में स्थानीय स्तर पर तनाव देखा जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विपक्षी दल और स्थानीय संगठन इस कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे व सुरक्षित आवास की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, दर्जनों परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं, जो सुरक्षा और आजीविका दोनों के मोर्चे पर एक गंभीर मानवीय संकट की ओर इशारा कर रहा है।

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