छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बेहद अजीबोगरीब और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ सर्पदंश (Snake Bite) से होने वाली मौतों पर मिलने वाले मुआवजे की राशि को हड़पने के लिए एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था। जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने फर्जी दस्तावेज, झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फर्जी गवाहों के सहारे शासन से करीब 70 लाख रुपये की अवैध वसूली कर ली है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
SSP ने दिए 15 मामलों की फिर से जांच के निर्देश
बिलासपुर एसएसपी (SSP) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक स्वीकृत किए गए मुआवजा प्रकरणों की गहन समीक्षा की। शुरुआती जांच में भारी अनियमितताएं पाए जाने के बाद एसएसपी ने 15 सबसे संदिग्ध मामलों की फाइलें फिर से खोलने और उनकी नए सिरे से जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं। पुलिस को शक है कि इन मामलों में मृतक असल में सर्पदंश का शिकार थे ही नहीं, बल्कि उनकी सामान्य मौत या किसी अन्य कारण से हुई मौत को मुआवजे के लालच में सर्पदंश का रूप दे दिया गया।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में निचले स्तर के कुछ राजस्व कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग के कर्मी और दलाल शामिल हो सकते हैं।
साजिश: किसी व्यक्ति की मौत होने पर उसे सांप काटने से हुई मौत दिखाना।
फर्जी दस्तावेज: अस्पताल और पुलिस की मिलीभगत से फर्जी पंचनामा और पीएम रिपोर्ट तैयार करना।
मुआवजा: शासन द्वारा सर्पदंश से हुई मृत्यु पर दी जाने वाली ₹4 लाख की राशि को आपस में बांट लेना।
दोषियों पर होगी एफआईआर और वसूली
एसएसपी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच टीम अब उन गांवों का दौरा कर रही है जहाँ से ये केस आए थे, और मृतकों के परिजनों के साथ-साथ गवाहों के बयान फिर से दर्ज किए जा रहे हैं। यदि मामले फर्जी पाए जाते हैं, तो न केवल दोषियों पर धोखाधड़ी (Section 420) का केस चलेगा, बल्कि उनसे गबन की गई पूरी राशि की वसूली भी की जाएगी।








