छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज का दिन बेहद हंगामेदार रहा। धान खरीदी और भुगतान की चर्चा के दौरान सदन में उस वक्त माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया जब विपक्षी सदस्यों (कांग्रेस) ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अवैध नशों के कारोबार को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्ष के एक वरिष्ठ सदस्य ने चर्चा के दौरान टिप्पणी की कि "छत्तीसगढ़ जो धान का कटोरा कहलाता था, वह अब धीरे-धीरे अफीम और नशों का कटोरा बनता जा रहा है।"
इस बयान के आते ही सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री अपनी सीटों से खड़े हो गए और इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता और प्रदेश के मेहनतकश किसानों का अपमान बताया। मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कांग्रेस छत्तीसगढ़ की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष के हमले और सरकार का घेराव
धान खरीदी: विपक्ष ने आरोप लगाया कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल का वादा करने वाली सरकार किसानों को बोनस की राशि किस्तों में दे रही है और रकबा कटौती से किसान परेशान हैं।
अवैध कारोबार: विपक्ष ने हाल के दिनों में पकड़े गए नशीले पदार्थों के मामलों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा और राज्य की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर सवाल उठाए।
मंत्री के जवाब और वॉकआउट
खाद्य मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि "विपक्ष हार से बौखला गया है और किसानों के नाम पर राजनीति कर रहा है।" उन्होंने रिकॉर्ड धान खरीदी के आंकड़े पेश किए। लेकिन विपक्ष मंत्री के गोलमोल जवाबों और 'अफीम' वाली टिप्पणी पर हुए पलटवार से संतुष्ट नहीं हुआ। नारेबाजी और तीखी नोकझोंक के बीच विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर 'किसान विरोधी' और 'असफल' होने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट (Walkout) कर दिया।
विपक्ष के बाहर जाने के बाद भी सदन में काफी देर तक इस टिप्पणी को लेकर चर्चा होती रही। भाजपा सदस्यों ने इस बयान को सदन की कार्यवाही से विलोपित करने की मांग भी की।

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