CG Crime : बिलासपुर से साइबर ठगी का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ ठगों ने 82 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर को 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फंसाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये लूट लिए। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर महिला को टेरर फंडिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी और सात दिनों तक उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर अलग-अलग किश्तों में मोटी रकम वसूल ली। इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता ने अपने बेटे से अतिरिक्त पैसों की मांग की, जिसके बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
यह पूरी वारदात बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है, जहाँ डीपी विप्र कॉलेज की रिटायर्ड प्रोफेसर रमन श्रीवास्तव को निशाना बनाया गया। 20 अप्रैल को ठगों ने व्हाट्सएप पर संपर्क कर खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया। आरोपियों ने महिला को डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट और ईडी के फर्जी नोटिस भेजे और दावा किया कि उनके बैंक खातों से अवैध टेररिस्ट फंडिंग हुई है। वीडियो कॉल के जरिए घंटों मानसिक प्रताड़ना दी गई और उन्हें हिदायत दी गई कि वे किसी को भी इस बारे में न बताएं, वरना उनके बेटे और पोतों को भी जेल भेज दिया जाएगा। इसी 'डिजिटल अरेस्ट' के दौरान डरी हुई महिला ने आरटीजीएस के माध्यम से कुल 1.04 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
ठगों का लालच यहीं नहीं रुका, उन्होंने पीड़िता से 50 लाख रुपये की और मांग की। जब महिला ने मुंबई में रहने वाले अपने बेटे प्रशांत श्रीवास्तव से इस बड़ी रकम की मांग की, तब बेटे को अनहोनी की आशंका हुई। बेटा तुरंत बिलासपुर पहुंचा और मां से बातचीत के बाद स्पष्ट हुआ कि वे किसी कानूनी कार्रवाई का नहीं बल्कि साइबर अपराधियों की साजिश का शिकार हुई हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 अप्रैल को बिलासपुर के रेंज साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने अज्ञात मोबाइल धारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318, 308 और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।








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