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हाईकोर्ट का कड़ा रुख: SDM को नहीं है विकलांग प्रमाण पत्र की वैधता तय करने का अधिकार, अधिकारों की सीमा तय

Chhattisgarh 06 April 2026 (44)

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अनुविभागीय अधिकारी (SDM) के पास विकलांग प्रमाण पत्र की सत्यता या उसकी वैधता पर फैसला लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। जस्टिस की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि दिव्यांगता का निर्धारण एक तकनीकी और चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें राजस्व अधिकारियों का हस्तक्षेप न्यायसंगत नहीं है।

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अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करना और उसकी जांच करना पूरी तरह से मेडिकल बोर्ड का कार्यक्षेत्र है। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी अपनी मर्जी से किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र को अवैध घोषित नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि किसी अधिकारी को प्रमाण पत्र की प्रमाणिकता पर संदेह है, तो उसे मामले को वापस मेडिकल बोर्ड को रेफर करना चाहिए, न कि खुद जज बनकर उसे निरस्त करना चाहिए।

इस फैसले से उन दिव्यांगों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें अक्सर सरकारी दफ्तरों में प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ता है। अक्सर नौकरियों या कल्याणकारी योजनाओं के सत्यापन के दौरान अधिकारी अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हुए प्रमाण पत्रों को दरकिनार कर देते थे। अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश के प्रशासनिक अमले को अपनी सीमाओं में रहकर काम करना होगा, जिससे दिव्यांगजनों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।

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