रायपुर: छत्तीसगढ़ की भौगोलिक बाधाएं अब सूचना क्रांति के रास्ते में रोड़ा नहीं बनेंगी। राज्य की हर ग्राम पंचायत तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुँचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य सरकार ने केंद्र को 3,500 करोड़ रुपये का एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर के दुर्गम इलाकों से लेकर सरगुजा की पहाड़ियों तक, प्रदेश की हर पंचायत को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (OFN) से जोड़ना है।
गाँवों में डिजिटल क्रांति का नया रोडमैप
इस भारी-भरकम निवेश के साथ छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है। वर्तमान में कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की धीमी गति एक बड़ी समस्या है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में देरी होती है।
ऑप्टिकल फाइबर का विस्तार: छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में जहां टावर कनेक्टिविटी कमजोर है, वहां जमीन के भीतर से केबल बिछाकर इंटरनेट पहुँचाया जाएगा।
कनेक्टिविटी गैप को भरना: पहले चरण में जो पंचायतें छूट गई थीं या जहां नेटवर्क अस्थिर है, उन्हें इस 3,500 करोड़ के प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी जाएगी।
आम नागरिक को क्या होगा फायदा?
हाई-स्पीड इंटरनेट केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा:
ई-गवर्नेंस: जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र जैसे काम पंचायत भवन में ही तुरंत हो सकेंगे।
ऑनलाइन शिक्षा: गाँवों के बच्चे बिना बफरिंग के उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो लेक्चर और ऑनलाइन क्लास का लाभ ले सकेंगे।
टेली-मेडिसिन: बड़े शहरों के डॉक्टरों से ग्रामीण मरीज वीडियो कॉल के जरिए परामर्श ले पाएंगे।
बैंकिंग सुविधाएं: गाँवों में बैंकिंग ट्रांजेक्शन तेज और सुरक्षित होंगे, जिससे 'डिजिटल पेमेंट' को बढ़ावा मिलेगा।








