मैनपाट (सरगुजा)। कुदरत के करिश्मे पूरी दुनिया में फैले हुए हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित 'मैनपाट' का एक हिस्सा वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों के लिए पहेली बना हुआ है। यहाँ 'जलयजली' नामक एक ऐसी जगह है, जहाँ की जमीन पर आप जैसे ही कदम रखते हैं, आपको ऐसा महसूस होता है जैसे आप किसी मोटे गद्दे या 'ट्रैम्पोलिन' (Trampoline) पर खड़े हों। यहाँ की धरती ठोस होने के बावजूद स्पंज की तरह दबती है और छोड़ने पर वापस ऊपर उछलती है।
पर्यटक यहाँ आकर जब एक साथ कूदते हैं, तो पूरी जमीन किसी पानी की लहर की तरह हिलने लगती है। स्थानीय लोग इसे 'हिलती धरती' भी कहते हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ की मिट्टी ऊपर से सूखी नजर आती है, लेकिन पैर रखने पर वह नीचे धंसती है और फिर गद्दे की तरह ऊपर की ओर प्रेशर मारती है। कई बार तो कूदने पर नीचे से पानी की हल्की फुहारें भी निकल आती हैं, जो इसके नाम 'जलयजली' को सार्थक करती हैं।
क्या है इसके पीछे का विज्ञान?
भू-गर्भ शास्त्रियों (Geologists) का मानना है कि इस जमीन के नीचे पानी का भारी दबाव और दलदली संरचना है, जिसके ऊपर मिट्टी और घास की एक मोटी परत जम गई है। यह परत एक कुशन (Cushion) की तरह काम करती है। आंतरिक जल स्रोतों के दबाव के कारण यह सतह लचीली हो गई है। हालाँकि, कुछ लोग इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं, तो कुछ इसे गुरुत्वाकर्षण से जोड़कर देखते हैं। सच जो भी हो, मैनपाट की यह जादुई जमीन आज छत्तीसगढ़ के पर्यटन का सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र बन चुकी है।








