रायपुर में आयोजित 'जनजातीय उद्यमिता सम्मेलन' को संबोधित करते हुए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने आदिवासी युवाओं के लिए एक बड़ा विजन साझा किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य जनजातीय समाज को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना है। ओराम ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अब "रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले" (Job Creators) बनने की दिशा में आगे बढ़ें। इसके लिए केंद्र सरकार स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के जरिए आदिवासी उद्यमियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
मंत्री जुएल ओराम ने कार्यक्रम के दौरान NSTFDC (राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम) की भूमिका पर जोर दिया, जिसने अब तक लाखों आदिवासियों को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें स्वावलंबी बनाया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वनोपज आधारित लघु उद्योगों और हस्तशिल्प की अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और सही मार्केटिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुँचाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने सफल जनजातीय उद्यमियों को सम्मानित भी किया, जो पारंपरिक खेती से हटकर डेयरी, मत्स्य पालन और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 'विकसित भारत 2047' के विजन पर काम किया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोलें ताकि आदिवासी युवा अपनी प्रतिभा को व्यवसाय में बदल सकें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।








