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छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र में सियासी संग्राम, बेरोज़गारी और धान खरीदी पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र दूसरे दिन भी पूरी तरह राजनीतिक गर्मी और तीखी बहसों के बीच जारी रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने राज्य में बढ़ती बेरोज़गारी, धान खरीदी व्यवस्था में खामियां, महिलाओं से जुड़ी योजनाएं और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोल दिया। सत्र के दौरान कई बार सदन का माहौल इतना गरमा गया कि कार्यवाही को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।

बेरोज़गारी पर सरकार को घेरा
विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं को रोजगार देने के नाम पर सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही है। विधानसभा में सवाल उठाया गया कि चुनाव से पहले किए गए रोजगार संबंधी वादों का अब तक क्या हुआ। विपक्ष का कहना था कि सरकारी भर्तियों में देरी और निजी क्षेत्र में अवसरों की कमी के कारण युवा वर्ग निराश है।
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार रोजगार सृजन के लिए लगातार प्रयास कर रही है और आने वाले समय में बड़े स्तर पर नियुक्तियां की जाएंगी।
धान खरीदी बना सबसे बड़ा मुद्दा
धान खरीदी को लेकर सदन में सबसे ज्यादा हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था, तकनीकी समस्याएं और भुगतान में देरी के कारण किसान परेशान हैं। कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि किसानों को बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सरकार की ओर से कहा गया कि धान खरीदी पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर बहस
महतारी वंदन योजना और अन्य महिला कल्याण योजनाओं को लेकर भी सदन में लंबी चर्चा हुई। विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में इन योजनाओं का लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुंच रहा है। वहीं सरकार ने दावा किया कि लाखों महिलाएं इन योजनाओं से लाभान्वित हो रही हैं।
हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित
लगातार हो रहे हंगामे और नारेबाजी के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सत्र और भी अधिक गरम हो सकता है क्योंकि विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की तैयारी में है।







