छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज एक बार फिर तेजी से बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 48 घंटों के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नए पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने से राज्य के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आंधी-तूफान की प्रबल संभावना है। अंधड़ की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है, जो जनजीवन को प्रभावित कर सकती है।
मौसम विभाग ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) का खतरा बना रहेगा। साथ ही, मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका जताई गई है। राजधानी रायपुर समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार शाम से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिससे बढ़ते तापमान पर लगाम लगी है। हालांकि, यह बदलाव किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि खलिहानों में रखी कटी फसल और आम की बौर को इस बेमौसम बारिश से भारी नुकसान पहुँच सकता है।
रायपुर मौसम केंद्र के अनुसार, वर्तमान में एक द्रोणिका (Trough Line) छत्तीसगढ़ से होकर गुजर रही है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी खींच रही है। इसके प्रभाव से अगले दो-तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से अस्थायी राहत मिलेगी। लेकिन, मौसम साफ होते ही अप्रैल के पहले सप्ताह से लू (Heat Wave) चलने और पारा 40 डिग्री के पार जाने के संकेत भी दिए गए हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और बड़े पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। बिजली विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि आंधी-तूफान के कारण बाधित होने वाली आपूर्ति को जल्द बहाल किया जा सके। मौसम का यह उतार-चढ़ाव स्वास्थ्य के लिहाज से भी संवेदनशील है, इसलिए डॉक्टरों ने वायरल बीमारियों से बचने की सलाह दी है।








